यूटी प्रशासन इस बार केंद्र सरकार से बजट के रूप में 600 करोड़ रुपये अधिक मांगेगा। इसकी तैयारी वित्त विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग ने मांग करने के लिए गुणा भाग करना भी शुरू कर दिया है।
बजट खर्च करने में इस बार प्रशासन ने काफी तेजी दिखाई है। अभी तक प्रशासन कुल बजट का 63 प्रतिशत खर्च कर चुका है। जो एक निर्धारित समय सीमा से कहीं ज्यादा है। सितंबर तक कुल बजट का 50 प्रतिशत खर्च होना जरूरी है। लेकिन इस बार 50 की बजाए 63 प्रतिशत बजट खर्च हो चुका है। इसी परफार्मेंस को देखते हुए वित्त मंत्रालय से 600 करोड़ रुपये अधिक मांगने की तैयारी कर ली गई है।
पिछले साल सितंबर तक 50 फीसदी बजट भी खर्च नहीं हो पाया था। जिस कारण रिवाइज्ड बजट एस्टीमेट में प्लान हेड से 226 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने काट लिए थे। जिसके बाद 860 करोड़ के बजट में से 634 करोड़ रुपये ही रह गए थे। यही कट 2016-17 में बजट कम मिलने का कारण भी बना था।
2016-17 में महज 700 करोड़ का प्लान बजट यूटी को मिला था। जबकि मांग 2 हजार 95 करोड़ की भेजी गई थी। इसमें स्मार्ट सिटी के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट भी शामिल था। वर्ष 2017-18 के लिए प्रशासन प्लान बजट के तहत 13 सौ करोड़ रुपये की मांग करेगा। वहीं बात नॉन प्लान बजट की करें तो 2016-17 के लिए 33 सौ 94 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। जिसमें से 32 सौ करोड़ रुपये ही मिले थे।