चंडीगढ़ सेक्टर-9 के एक मकान की 50 फीसदी हिस्सेदारी के ट्रांसफर का मामला चार साल तक एस्टेट ऑफिस में लटका रहा। इस मामले में राइट टू सर्विस कमीशन ने तीन साल पहले पंजाब जा चुके पीसीएस अधिकारी को पेशी पर बुलाया और सवाल-जवाब किए। उन्हें लिखित में चेतावनी जारी की गई। अन्य दो कर्मियों पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। क्लर्क ने नोटिंग शीट से छेड़छाड़ भी की, इस पर विभागीय कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं।
सुनवाई में पता चला कि मकान की मूल फाइल दिसंबर 2015 में सीबीआई ने एक अन्य केस में जब्त की थी। एस्टेट ऑफिस ने अक्तूबर 2021 में सीबीआई को पत्र लिखकर फाइल लौटाने का अनुरोध किया, जिस पर सीबीआई ने जवाब दिया कि फाइल स्पेशल जज सीबीआई कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर जमा है। कमीशन ने पाया कि जनवरी 2021 में आवेदन मिलने के बाद एस्टेट ऑफिस ने सीबीआई से संपर्क करने में ही 10 महीने लगा दिए और आवेदक को फाइल जब्त होने की जानकारी समय पर नहीं दी। साथ ही नोटिंग शीट की जांच में पता चला कि पूर्व एईओ हरजीत सिंह संधू ने अलग-अलग मौकों पर फाइल आगे बढ़ाने में कुल 35 दिन की देरी की। आयोग ने हरजीत सिंह संधू को रिकॉर्डेबल चेतावनी दी और एस्टेट ऑफिस को निर्देश दिया कि देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश की जाए।
इस मामले में कमीशन ने सीनियर असिस्टेंट शिव कुमार को भी नोटिस जारी किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने 62 दिन की देरी की। शिव कुमार ने भी सीबीआई के पास फाइल होने का तर्क दिया, जिसे कमीशन ने उचित नहीं माना और 3000 रुपये का जुर्माना लगाया। कमीशन ने माना कि सीबीआई की जब्ती का मामला इस मामले से बिल्कुल अलग है, इसलिए इसे विवादित बताकर समय सीमा नहीं बढ़ाई जा सकती।
कमीशन ने इस मामले की भी जांच की है कि सीबीआई को 10 महीने बाद क्यों मकान की फाइल के लिए लिखा गया। इस पर पता चला कि क्लर्क राकेश ने 28 दिन तक अधिकारी के पास फाइल ही नहीं भेजी। इसके अलावा कुल उन पर 154 दिनों की देरी का आरोप लगा। साथ ही नोटिंग शीट पर कटिंग व ओवरराइटिंग का आरोप लगा, जिसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भी माना। इस पर कमीशन ने 7000 रुपये का जुर्माना लगाया और कागजों में छेड़छाड़ के लिए विभागीय जांच और कार्रवाई के लिए लिखा। इसके लिए एईओ नवीन को तीन महीने का समय दिया गया है।