फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व हाइपरटेंशन दिवस: पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले 15 प्रतिशत बच्चे हाइपरटेंशन की चपेट में

Fri, 17 May 2024 04:43 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भारत में 10 से 12 साल के 35 प्रतिशत बच्चे और 13 वर्ष की उम्र के ऊपर के 25 प्रतिशत बच्चे हाइपरटेंशन की चपेट में हैं। जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक भारत में हर 3 या 4 बच्चों में से एक को हाई ब्लड प्रेशर है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में इलाज के लिए आने वाले 10 से 15 प्रतिशत बच्चों में हाइपरटेंशन की समस्या सामने आ रही है। चिंता की बात है कि किडनी संबंधी मर्ज के साथ अब मोटापा हाइपरटेंशन बढ़ाने के मुख्य कारण के रूप में सामने आने लगा है। इसे शुरुआती दौर में नियंत्रित कर बच्चों को इस गंभीर मर्ज की चपेट में आने से बचाया जा सकता है।

विज्ञापन


एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के एएमएस व इमरजेंसी और आईसीयू के प्रो. अरुण बंसल ने बताया कि कुछ वर्ष पहले तक बच्चों में हाइपरटेंशन का खतरा 5 से 7 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 10 से 15 प्रतिशत पर आ गया है। यह बेहद खतरनाक स्थिति है क्योंकि ऐसे बच्चों में हाइपरटेंशन के कारण अन्य गंभीर बीमारियां होने का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। डॉ. अरुण ने बताया कि इन बच्चों में से 25 से 30 प्रतिशत में मोटापा और किडनी इसके मुख्य कारण के रूप में सामने आया है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों के वजन को नियंत्रित करने पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है। उनके खानपान में फास्ट फूड, जंक फूड जैसी चीजों को शामिल न कर उनकी शारीरिक क्रियाशीलता को बढ़ाने का प्रयास करना बेहद जरूरी है।

10-12 साल के बच्चे भी हाइपरटेंशन की चपेट में
डॉ. अरुण का कहना है कि भारत में 10 से 12 साल के 35 प्रतिशत बच्चे और 13 वर्ष की उम्र के ऊपर के 25 प्रतिशत बच्चे हाइपरटेंशन की चपेट में हैं। जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक भारत में हर 3 या 4 बच्चों में से एक को हाई ब्लड प्रेशर है। 13 साल से ऊपर के बच्चों में यदि बीपी 130/80 से ऊपर है तो इसे हाइपरटेंशन माना जाता है। बचपन में हाइपरटेंशन तो 25 की उम्र में किडनी और दिल की बीमारियां देश में 25 से 40 वर्ष के बीच के युवाओं को हार्ट अटैक, किडनी की बीमारी और ब्रेन हैमरेज जैसी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। बच्चों पर हर वक्त पढ़ाई का दबाव बनाते रहना ठीक नहीं। उनका खेलना-कूदना भी उतना ही जरूरी है, जितना पढ़ना।
विज्ञापन


ये जानना जरूरी
जिस समय दिल रक्त प्रवाह करने के बाद आराम की स्थिति में आता है, उस समय रक्त का दबाव बहुत कम हो जाता है। इस रक्त दबाव माप को प्रसारक (डायस्टोलिक) दबाव कहा जाता है। पुरुषों के लिए रक्तचाप की ऊपरी सीमा 90/60 से 145/90 तक हो सकती है। नवजात शिशुओं का ब्लड प्रेशर 90/60, छह महीने से दो साल तक के बच्चों का रक्तचाप 100/70, 18 साल के बच्चों का रक्तचाप 120/80, 40 साल के व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 135/80 और वृद्ध लोगों का रक्तचाप 145/90 तक हो सकता है।

ये कारण हैं जिम्मेदार
मोटापा, मधुमेह, व्यायाम न करना, आनुवांशिक, लगातार तनाव में रहना, धूम्रपान और थायराइड।

ये भी जान लें
सामान्य बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर के स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हृदयाघात, मधुमेह और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक स्तर होता है।

बीपी की जांच जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करें और हर महीने चेकअप करवाएं। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न धूम्रपान करें।

बचाव के लिए ये करें

  • प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें। इसमें ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग, एरोबिक्स डांस को शामिल करें। वॉक में एक मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में एक मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलना चाहिए।
  • यदि तेज नहीं चल पाते हैं तो रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें। दिल के मरीज हैं तो एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
  • नमक की मात्रा कम करें। सलाद पर नमक न डालें। पापड़ खाने से बचें। दिनभर में आधा चम्मच से ज्यादा नमक न खाएं।
  • वजन को नियंत्रण में रखें। वजन को चेक करते रहें।
  • तनाव दूर करने के लिए अपने शौक को पूरा करने के लिए समय निकालें।
  • फल और हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जौ, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि) ज्यादा खाएं।


इससे कर लें तौबा
फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), कोल्डड्रिंक, मीठी चीजें, चावल, मैदा, सैचुरेटेड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल) पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट और फुल क्रीम दूध के सेवन से बचें।

ये अनदेखी हो सकती है आपके लिए खतरनाक
बिना डॉक्टर की सलाह खुद दवा बंद न करें। नार्मल बीपी आने पर कुछ लोग दोस्तों व परिजनों की सलाह पर दवा नहीं लेते, जबकि यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। फॉलोअप में मरीज नहीं आते। कई बार दवा कम करनी होती है तो कई बार दवा बढ़ानी होती है इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर होने पर डॉक्टर के संपर्क में रहें और चेकअप कराते रहें ताकि स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न आए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें