फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PGI में बीड़ी-सिगरेट पीने से पहले खबर पढ़ लें

Wed, 04 Nov 2015 04:36 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
अगर आप पीजीआई में खड़े होकर बीड़ी या सिगरेट पीते हैं तो यह खबर पढ़ लीजिए और सावधान हो जाइए। नहीं तो आपको चालान भरना पड़ेगा। यूटी एडमिनिस्ट्रेशन ने पीजीआई को चालान काटने की पावर दे दी है।
विज्ञापन


अप्रैल में पीजीआई ने यूटी से चालान काटने की परमिशन मांगी थी। अब यदि कोई मरीज का परिजन या स्टाफ कर्मी सिगरेट या बीड़ी पीते दिखा तो उसका 200 रुपये का चालान कट जाएगा।

पीजीआई के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर एके गुप्ता ने चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी को पत्र लिखकर बताया था कि पीजीआई में हर साल 20 लाख मरीज आते हैं।

इनमें हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड के अलावा वेस्टर्न यूपी के भी मरीज शामिल हैं। इनमें इनके साथ आने वाले परिजन खूब धूम्रपान करते हैं।

एहतियात के तौर पर पीजीआई की ओर से कई कदम उठाए गए, लेकिन धूम्रपान के ट्रेंड में कोई कमी नहीं आ रही। इससे दूसरे मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है। दावा किया गया है कि चालान के डर से लोग इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे। पीजीआई का लक्ष्य है कि संस्थान को स्मोक फ्री बनाया जाए।
विज्ञापन


अब तक ये कदम उठाए जा रहे हैं
पीजीआई की ओर से ओपीडी, नेहरू हास्पिटल, इमरजेंसी व अन्य हिस्सों में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों की गेट पर ही तलाशी ले ली जाती है। उस दौरान जो भी धूम्रपान का सामान मिलता है, उसे सुरक्षाकर्मी गेट पर रखे डब्बे में रखवा लेते हैं। इससे ओपीडी व नेहरू हास्पिटल अंदर तो लगाम कसी गई, लेकिन बाहर अब भी धुआं ही धुआं देखने को मिलता है।

हर महीने खूब जमा होता है स्मोकिंग मैटीरियल
पीजीआई की ओर से होम सेक्रेटरी को बताया गया है कि पीजीआई ने एक साल में करीब 400 किलोग्राम स्मोकिंग मैटीरियल मरीजों व उनके परिजनों से मिला है। इस मैटीरियल को नष्ट करना भी पीजीआई के सामने एक चुनौती है। इतनी सख्ती के बावजूद कई बार लोग अंदर स्मोकिंग मैटीरियल ले जाने में कामयाब भी हो जाते हैं।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें