उन्होंने कहा कि यह बहुत ठोस शुरुआत है, जिसे पर्यावरण मसलों के हल के लिए देशभर में जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। ‘साफ सुथरे पर्यावरण’ को समय की मुख्य मांग बताते हुए चेयरमैन ने कहा कि साफ सुथरा, हरा भरा और सकारात्मक कदमों और पर्यावरण कानूनों की सख्ती से पालना को यकीनी बनाने के लिए इससे जुड़े सभी हिस्सेदारों का अधिक से अधिक सम्मेलन के अलावा आम लोगों को भी इससे जोड़ा जाए। इस सत्र में पंजाब के मुख्य सचिव करन अवतार सिंह और पर्यावरण के प्रमुख सचिव राकेश वर्मा और हरियाणा के मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने भी हिस्सा लिया।
एनजीटी द्वारा पूर्ण सहयोग का भरोसा देते हुए चेयरमैन ने कहा कि फंड की कोई कमी नहीं है और लोग हरसंभव मदद के लिए तैयार हैं क्योंकि साफ सुथरा पर्यावरण बहुत जरूरी विषय है। अवशेषों का जिक्र करते हुए जस्टिस गोयल ने कहा कि संबंधित अथॉरिटी को कमांड और कंट्रोल के मॉडल को सही मायनों में लागू करना चाहिए ताकि इसमें और सुधार लाने के साथ-साथ निर्धारित लक्ष्य भी हासिल किए जा सकें। चेयरमैन ने आगे कहा कि पर्यावरण कानूनों और उद्योग के बीच कोई टकराव नहीं है।
देश के 4100 शहरों में कूड़े के बड़े ढेर
पंजाब और हरियाणा सरकारों को कूड़े के बड़े ढेर हटवाने और इन ढेरों की नीचे की जमीन की सफाई की अपील करते हुए जस्टिस गोयल ने कहा कि हमारे देश के 4100 शहरों में कूड़े के ढेर वाले 4100 स्थान हैं, जिन्हें कारोबार और रोजगार के मौकों के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि जब तक कूड़े के ढेरों का मसला हल नहीं होता, तब तक साफ सुथरे पर्यावरण का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता।