स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े 116 करोड़ रुपये के घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा ने चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) नलिनी मलिक को मोहाली से गिरफ्तार कर लिया है। वीरवार को आरोपी को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, नलिनी मलिक ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उसने नगर निगम के तत्कालीन चीफ इंजीनियर एनपी शर्मा और एक पूर्व आईएएस अधिकारी के कहने पर इस घोटाले को अंजाम दिया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग नहीं कर रही और उसने कई अहम डिजिटल सबूत भी नष्ट कर दिए हैं। अब पुलिस उसके खिलाफ साक्ष्य मिटाने की धाराएं जोड़ने की तैयारी में है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने फर्जीवाड़े के जरिये हरियाणा, ट्राइसिटी और दिल्ली-एनसीआर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खड़ी कर लीं। इन संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालने के लिए पुलिस विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी का पति भी अकाउंट ऑफिसर है और दोनों ने अपने पेशे का फायदा उठाते हुए इस पूरे नेटवर्क को अंजाम दिया। पुलिस कई दिनों से नलिनी मलिक की तलाश में दबिश दे रही थी। हाल ही में उसके करनाल में होने की सूचना मिली थी लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह फरार हो गई थी।
गौरतलब है कि इसी मामले में पुलिस पहले ही क्रेस्ट के अकाउंटेंट साहिल कुक्कर को गिरफ्तार कर चुकी है जो फिलहाल पुलिस रिमांड पर है। इससे पहले प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके अलावा रिभव ऋषि, अभय कुमार और सीमा धीमान को भी हरियाणा से प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की गई थी। इन आरोपियों ने पूछताछ में कई अधिकारियों की भूमिका का खुलासा किया था। पुलिस का कहना है कि मामले में और भी बड़े खुलासे संभव हैं और जल्द ही अन्य आरोपियों पर शिकंजा कस सकता है।