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तेज बहादुर ने देश की छवि को खराब करने का मौका पाकिस्तान को दियाः केंद्र सरकार

Wed, 27 Feb 2019 11:13 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीमा पर तैनात जवानों को घटिया खाना परोसे जाने का वीडियो वायरल होने के मामले में केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा कि तेज बहादुर ने जो किया उससे दुश्मन मुल्कों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि खराब करने का मौका मिल गया। तेज बहादुर ने केंद्र सरकार के इस जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए हाईकोर्ट से समय दिए जाने की अपील की है। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए सुनवाई सितंबर तक स्थगित कर दी।

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एनआईए की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि तेज बहादुर के फेसबुक पर कई पाकिस्तानी दोस्त थे। उसकी तैनाती एलओसी पर थी और ऐसे में सेना के जवान का संवेदनशील इलाके में ड्यूटी के दौरान दुश्मन देश के एफबी मित्रों के संपर्क में रहना बेहद गंभीर विषय है। तेज बहादुर को 14 साल की सजा दी जा सकती थी। हालांकि इससे बहुत कम सजा बर्खास्तगी के रूप में दी गई है। केंद्र ने कहा कि दुश्मन राष्ट्र मौका ढूंढते हैं कि कैसे किसी देश की छवि धूमिल की जाए और वह मौका तेज बहादुर ने उन्हें दे दिया। 

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
तेज बहादुर ने एडवोकेट एसपी यादव के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसने बीएसएफ से वीआरएस के तहत स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति दिए जाने की मांग की थी। पहले उसे इसकी इजाजत दे दी गई, लेकिन बाद में वीआरएस का आदेश रद्द कर उसे बिना कोई पूर्व नोटिस दिए ही बर्खास्त कर दिया गया। 

याचिकाकर्ता ने अक्तूबर 2015 में घटिया खाना दिए जाने की सैनिक सम्मेलन में शिकायत की थी। दिसंबर 2016 उसका एफडीएल एडम बेस खेत में तबादला कर दिया गया था। यहां जवानों को बेहद घटिया खाना मिलता था। शिकायत करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता और उसके साथियों ने तय किया कि इस घटिया खाने की वीडियो बना सैनिक सम्मेलन में उच्च अधिकारियों को इसे दिखा उन्हें हालत की जानकारी देंगे। लेकिन उसे पता ही नहीं चला कि कब उसके साथियों ने यह वीडियो उसके फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। 23 फरवरी को उसके खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी गई और 19 अप्रैल को उसकी बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए गए।

 तेज बहादुर की याचिका पर केंद्र ने बताया कि सेना का कोई जवान कभी भूखे पेट नहीं सोता है। न तो याची ने सैनिक सम्मेलन में यह मुद्दा उठाया और न ही किसी सीनियर अधिकारी को शिकायत दी। साथ ही जांच के दौरान याची ने माना था कि उसने यह वीडियो अपलोड किया है।
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