पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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तेज बहादुर ने एडवोकेट एसपी यादव के जरिये हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि उसने बीएसएफ से वीआरएस के तहत स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति दिए जाने की मांग की थी। पहले उसे इसकी इजाजत दे दी गई, लेकिन बाद में वीआरएस का आदेश रद्द कर उसे बिना कोई पूर्व नोटिस दिए ही बर्खास्त कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने अक्तूबर 2015 में घटिया खाना दिए जाने की सैनिक सम्मेलन में शिकायत की थी। दिसंबर 2016 उसका एफडीएल एडम बेस खेत में तबादला कर दिया गया था। यहां जवानों को बेहद घटिया खाना मिलता था। शिकायत करने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता और उसके साथियों ने तय किया कि इस घटिया खाने की वीडियो बना सैनिक सम्मेलन में उच्च अधिकारियों को इसे दिखा उन्हें हालत की जानकारी देंगे। लेकिन उसे पता ही नहीं चला कि कब उसके साथियों ने यह वीडियो उसके फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। 23 फरवरी को उसके खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी गई और 19 अप्रैल को उसकी बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए गए।
तेज बहादुर की याचिका पर केंद्र ने बताया कि सेना का कोई जवान कभी भूखे पेट नहीं सोता है। न तो याची ने सैनिक सम्मेलन में यह मुद्दा उठाया और न ही किसी सीनियर अधिकारी को शिकायत दी। साथ ही जांच के दौरान याची ने माना था कि उसने यह वीडियो अपलोड किया है।