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चंडीगढ़ में बिना संशोधन लागू होगा केंद्र का आदर्श किराएदारी अधिनियम, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी

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चंडीगढ़। शहर में जल्द ही आदर्श किराएदारी अधिनियम को लागू कर दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को आदर्श किराएदारी अधिनियम को जारी करने की मंजूरी दे दी। यूटी प्रशासन में एस्टेट के अतिरिक्त सचिव उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि केंद्र की तरफ से जारी अधिनियम को शहर में लागू कर दिया जाएगा। प्रशासन पहले ही लोगों के सुझाव व आपत्तियां ले चुका है, इसलिए इसमें अब कोई संशोधन नहीं किया जाएगा।
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यूटी प्रशासन ने अधिनियम की अधिसूचना का प्रारूप एक अक्तूबर 2020 को जारी किया था और शहरवासियों से आपत्तियां व सुझाव मांगे थे। सुझाव देने के लिए प्रशासन ने एक महीने का समय दिया था। सैकड़ों लोगों ने अपने सुझाव सौंपे थे, जिसे प्रशासन ने केंद्र को भेजा था। इस नए अधिनियम के अनुसार, मकान मालिकों और किराएदारों के बीच एक लिखित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिसमें किराए से लेकर हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी तय की जाएगी। यहां तक कि यह भी साफ रहेगा कि मकान की पुताई कौन करवाएगा। इसके अलावा नल की टोटी से लेकर वॉश बेसिन और पंखे या खराब स्विच कौन बदलवाएगा, इसको लेकर भी अधिनियम में जिम्मेदारी तय की गई है।
सचिव उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि केंद्र से आधिकारिक सूचना आने के बाद कुछ दिनों बाद चंडीगढ़ में इस अधिनियम की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। कानून लागू होने के बाद मकान मालिक और किराएदार के बीच किसी भी तरह कोई समस्या की सुनवाई किराया प्राधिकरण और किराया न्यायालय में की जाएगी। जानकारी के अनुसार, किराया न्यायालय में सदस्य पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के परामर्श के बाद रखे जाएंगे। राज्य उच्च न्यायिक सेवा के सदस्यों को ही किराया न्यायालय का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा प्रशासक शहर के जरूरत के अनुसार किराया न्यायाधिकरण का गठन कर सकते हैं।
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आदर्श किराएदारी अधिनियम के फायदे
- लिखित करार के बिना कोई परिसर किराए पर नहीं दिया जा सकेगा
- यह रिहायशी और व्यावसायिक किराएदारों पर लागू होगा
- मकान मालिकों के साथ किराएदारों के भी हितों की भी रक्षा होगी
- नए कानून से उम्मीद है कि मकान मालिक अपने खाली फ्लैट या मकान किराए पर देने से नहीं डरेंगे
- भवन के ढांचे की देखभाल के लिए किराएदार और मकान मालिक दोनों ही जिम्मेदार होंगे
- किसी भी झगड़े की स्थिति में किराएदार किराया प्राधिकरण से संपर्क कर सकेगा
आदर्श किराएदारी अधिनियम के मुख्य बिंदु
- 24 घंटे पूर्व सूचित करने के बाद ही मकान मालिक किरायेदार के परिसर में कर सकेंगे प्रवेश
- किराएदार से विवाद होने की स्थिति में मकान मालिक बिजली-पानी की आपूर्ति नहीं काट सकता है
- किराया अनुबंध में लिखी अवधि से पहले किराएदार को तब तक नहीं निकाला जा सकता
- अनुबंध खत्म होने के बाद भी मकान खाली नहीं हुआ तो मकान मालिक को दोगुना मासिक किराया मांगने का अधिकार
- किराए का तीन गुना सुरक्षा राशि लेना तब तक गैर-कानूनी होगा, जब तक इसका अनुबंध न बनवाया गया हो
- किराएदार के घर खाली करने पर मकान मालिक को एक महीने के भीतर यह सुरक्षा राशि लौटानी होगी
- अगर मकान मालिक ढांचे में कुछ सुधार कराता है तो उसे मरम्मत का काम खत्म होने के एक महीने बाद किराया बढ़ाने की इजाजत होगी
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