फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रूबानी ने हासिल किया ऑल इंडिया थर्ड रैंक, जज बनने की है ख्वाहिश, पुराने पेपरों से मिली कामयाबी

Thu, 02 May 2019 09:33 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
विज्ञापन
छात्रा रुबानी चीमा
विज्ञापन

विद्या देवी जिंदल स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा रुबानी चीमा ने सीबीएसई की परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर तीसरी रैंक हासिल की है। मूलरूप से करनाल जिले के गांव पखाना की रहने वाली रुबानी ने पांच विषयों में से चार में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं। रुबानी ने 500 में से 497 अंक हासिल किए हैं। 

विज्ञापन


सिर्फ अंग्रेजी में उनके तीन नंबर कट गए। उन्हें अंग्रेजी में 97 अंक हासिल हुए हैं, जबकि इकोनॉमिक्स, ज्योग्राफी, साइकोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। रुबानी ने बताया कि वह परीक्षा से कुछ दिन पहले तक रात दो बजे तक भी अपने सहपाठियों के साथ हॉस्टल में पढ़ाई करती थी। पिछले सालों के पेपर हल करके परीक्षा की तैयारी करती थी। इसके अलावा सालभर नियमित रूप से पढ़ती थी, ताकि परीक्षा के दिनों में ज्यादा दबाव न झेलना पड़े।

फोन पर रो पड़ती तो मां बढ़ाती थी हौसला

अपने माता-पिता के साथ रुबानी
रुबानी का कहना है कि अक्सर वह हिम्मत हार जाती और फोन पर परिजनों से बात करते हुए रोने लग जाती थी। ऐसी स्थिति में उनकी मां गगनदीप कौर उसका हौसला बढ़ाती थीं। मां से मिले हौसले से उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता और वह फिर से दृढ़ निश्चय के साथ अपनी पढ़ाई को जारी रखती। रुबानी ने बताया कि उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि वह इतनी अच्छी रैंकिंग हासिल करेगी।

आठ साल पहले हिसार में लिया था दाखिला
रुबानी के पिता अमनदीप सिंह चीमा करनाल जिले में ही राइस मिल चलाते हैं। उनकी मां गगनदीप कौर गृहिणी हैं, इकलौता भाई जयकीरत सिंह पढ़ाई के लिए कनाडा गया हुआ है। रुबानी का आठ साल पहले हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल में पांचवीं कक्षा में दाखिला करवाया गया था। तभी से वह लगातार यहीं पढ़ रही थी। यहां वह स्कूल के हॉस्टल में रहती थी। परिवार से दूर रहते हुए भी रुबानी ने अपनी पढ़ाई पर अधिक फोकस किया।
विज्ञापन

जितनी जरूरत रही, उतना ही सोशल मीडिया को छुआ

रुबानी बताती हैं कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। जितनी जरूरत होती थी, उतना सोशल मीडिया का प्रयोग भी करती थी। मगर परीक्षा के दिनों में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करने के कारण सोशल मीडिया का नाममात्र ही यूज कर पाती थी। रुबानी ने बताया कि उसने किसी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि स्कूल में ही रहकर पढ़ाई की।

न्यायिक क्षेत्र में जाना है मकसद
रुबानी कहती हैं कि वह अभी आगे साइकोलॉजी ऑनर्स की पढ़ाई करेंगी। इसके बाद वह न्यायिक क्षेत्र में अपना भविष्य बनाएंगी। उसका भाई पढ़ाई के लिए विदेश गया हुआ है। इसलिए सभी उसको भी विदेश में पढ़ाई करने के लिए कहते हैं।

मगर वह जज बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। रुबानी की उपलब्धि पर उनकी मां गगनदीप कौर व पिता अमनदीप सिंह चीमा ने भी खुशी जाहिर करते हुए बेटी के सपनों को साकार करने में पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया।

ग्रेसी सिंह ने पाए 496 अंक
रुबानी चीमा के अलावा विद्या देवी जिंदल स्कूल की ही 12वीं कक्षा की छात्रा रही ग्रेसी सिंह ने भी शानदार उपलब्धि हासिल की है। ग्रेसी सिंह ने 500 में से 496 अंक लेकर स्कूल में सेकंड टॉपर का खिताब जीता है। ग्रेसी सिंह मूलरूप से देहरादून के राजपुर रोड की रहने वाली हैं। उन्होंने नौवीं कक्षा में हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल में दाखिला लिया था।

ग्रेसी सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। उनके पिता विनोद कुमार सिंह आर्मी में कर्नल हैं, जबकि मां सुचित्रा सिंह गृहिणी है। ग्रेसी अब पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन करने के बाद इंटरनेशनल अफेयर्स के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रयास करेंगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें