चंडीगढ़। एस्टेट ऑफिस में कॉलोनी ब्रांच की अलॉटमेंट विंग के क्लर्क संजीव कुमार व दलाल सतपाल को सीबीआई ने एक लाख की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार कर मंगलवार को अदालत में पेश किया। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, इससे पहले सीबीआई ने इन दोनों के घर सहित संजीव के कार्यालय में छानबीन करत कई संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
सीबीआई को दी गई शिकायत में नारायण स्वामी निवासी बापूधाम कॉलोनी सेक्टर-26 (फेज-2) ने बताया कि जिस मकान में वह रहते है, वह उनकी नानी का मकान है। उसकी नानी करीब 40 साल से यहां रहती थी। बाकायदा इस मकान को लेकर उसके पिता की ओर से अदालत में केस भी दायर किया गया था। इसमें वर्ष 2006 और 2013 में उनके पक्ष में मकान का फैसला आया था। कई साल से उनका मकान पर कब्जा है और वह पूरे परिवार सहित यहां रहते हैं। उनका यह विवाद काशिलिंगम के साथ मकान के ऑनरशिप ( स्वामित्व) को लेकर था। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने मकान की किराया पर्ची जारी करने के लिए अदालत के फैसले का वर्ष 2014 में चंडीगढ़ एस्टेट कार्यालय में दावा किया था। वहीं, अब बीते नौ अक्तूबर को सतपाल नामक एक व्यक्ति उनके घर आया और खुद को एस्टेट कार्यालय की बिल्डिंग शाखा का डीलिंग हैंड बताया। उसने धमकी दी कि वह अपने परिवार सहित अवैध रूप से इस मकान में रह रहे हैं और एस्टेट कार्यालय काशिलिंगम के नाम पर किराया पर्ची जारी करने वाला है।
ऐसे में शिकायतकर्ता ने अगले दिन 10 अक्तूबर को फिर से सतपाल से मुलाकात की और किराया पर्ची के मामले को सुलझाने के लिए उससे 2.50 लाख रुपये की डिमांड की। सतपाल ने शिकायतकर्ता को बताया कि किराया पर्ची का मामला एस्टेट ऑफिस की कॉलोनी शाखा के प्रभारी संजीव की ओर से देखा जा रहा है। इसी कड़ी में सतपाल ढाई लाख रुपये में से पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये लेने के लिए सोमवार शाम को करीब सवा चार बजे बापूधाम कॉलोनी में गया था। शिकायतकर्ता से सतपाल ने जैसे ही एक लाख रुपये रिश्वत ली तो उसी समय सीबीआई ने उसे दबोच लिया। इसके बाद उसकी निशानदेही पर सीबीआई की टीम इस्टेट ऑफिस में पहुंची और शाम सात बजे क्लर्क संजीव कुमार काेे गिरफ्तार किया। इसके बाद दोनों के घरों में तलाशी अभियान चलाकर टीम ने कई दस्तावेज बरामद किए। वहीं, शिकायतकर्ता ने जो एक लाख रुपये भी दलाल को दिए थे, वह पैसे भी उसने अपनी पत्नी के जेवर एक निजी फाइनेंस बैंक में रखकर लिए थे और इसके बाद सीबीआई के आदेशानुसार दलाल को दिए थे।
दलाल और शिकायतकर्ता के बीच बातचीत का ऑडियो
शिकायतकर्ता: भइया थोड़ा बहुत कम दो यार
दलाल: ये तेरे लिए ही कम किए हैं वरना इस काम के लिए 3.5 लगते हैं।
शिकायतकर्ता: 2.50 लाख देने की औकात नहीं है हमारी भइया
दलाल: ठीक है, फिर रहने दाे, इससे नीचे तो
शिकायतकर्ता: 1.5 लाख ही कर दो
दलाल: अरे नहीं-नहीं, 2.50 लाख अगले को मैंने बोल दिया है, उसने तो 3.5 लाख लेने के लिए ही बोला था और कह रहा है कि तूने 2.50 लाख कैसे बोल दिए हैं
शिकायतकर्ता: अच्छा, ऐसा बोल रहा है। अच्छा पर्ची तो आप ही कटवाओगे न
दलाल: हां मैं ही कटवाउंंगा। उसके लिए बेफिक्र रहे
शिकायतकर्ता: अच्छा-अच्छा
दलाल: लेकिन पर्ची कटने में ढाई-तीन महीने लगेंगे।
शिकायतकर्ता: भइया मेरा दिमाग तो घूमा पड़ा है, मैं कहां से 2.50 लाख करूंगा।
दलाल: देखो जी, मैं ताे यह सिर्फ आपके लिए कर रहा हूं।
शिकायतकर्ता: मेरी मम्मी पैरालाइज हो रखी है, थोड़ा बहुत देख लो भइया।