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Chandigarh News: डॉक्टरों की हड़ताल से और बिगड़े हालात<bha>;</bha> पीजीआई पहुंचा हाईकोर्ट, मंत्रालय ने कहा-फंड जारी करने पर कर रहे विचार

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चंडीगढ़। हॉस्पिटल अटेंडेंट, किचन स्टाफ, सफाईकर्मियों और ऑफिस बियरर की छह दिन से जारी हड़ताल के बीच मंगलवार को पीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी काम छोड़कर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी। रेजिडेंट डाॅक्टर कोलकाता कांड में इंसाफ की मांग कर रहे हैं। अनुबंधकर्मियों की हड़ताल से पहले ही स्थित चरमराई हुई थी, डॉक्टरों की हड़ताल से स्थिति और बिगड़ गई।
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उधर, अनुबंधकर्मियों की विभिन्न यूनियनों की हड़ताल के खिलाफ पीजीआई ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई का फैसला लिया है। वहीं, अनुबंधकर्मियों को एरियर जारी करने के लिए पीजीआई ने कुछ दिन पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को पत्र लिखा था, इस मामले में अब मंत्रालय का जवाब आया है। मंत्रालय का कहना है कि फंड जारी करने पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है।
हड़ताल के चलते मंगलवार को भी ओपीडी में किसी नए मरीज का पंजीकरण नहीं हुआ। ऐसे में बड़ी संख्या में दूर-दूराज से आए मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा। वैकल्पिक सर्जरी भी नहीं हुई। बुधवार को भी नए मरीजों का पंजीकरण नहीं होगा और ऑनलाइन पंजीकरण भी रद्द कर दिए गए हैं। वैकल्पिक प्रवेश और सर्जरी भी स्थगित कर दी गईं हैं। उधर, पीजीआई प्रशासन ने दावा किया कि रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल का कोई खास असर नहीं हुआ क्योंकि 1300 रेजिडेंट डॉक्टरों में से 80% से ज्यादा ड्यूटी पर थे। दूसरी तरफ बीते छह दिनों से चल रही अनुबंधकर्मियों की हड़ताल की सूचना से अन्य प्रदेशों से आने वाले मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है।
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मंगलवार को रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन की तरफ से की गई हड़ताल की घोषणा को देखते हुए पीजीआई प्रशासन ने फैकल्टी को ओपीडी की कमान संभालने के निर्देश दिए थे। इसके चलते वरिष्ठ चिकित्सक सुबह ही ओपीडी में पहुंच गए थे। इससे फॉलोअप के मरीजों को कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़ी। कई विभागों के रेजिडेंट डॉक्टरों ने हड़ताल में भाग नहीं लिया। इससे भी मरीजों को राहत मिली।
उधर, कर्मचारियों के हड़ताल के बीच राहत की बात यह है कि उनके बकाया एरियर और बढ़े हुए वेतन भुगतान को लेकर मंत्रालय ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। इस संबंध में मंत्रालय से पीजीआई को मिले पत्र में बताया गया है कि बकाया वेतन के भुगतान की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है, जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।


दो दिन में करीब 9 हजार मरीज बिना इलाज लाैटे
पीजीआई में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या करीब 12 हजार है। सोमवार और मंगलवार को नए मरीजों के लिए ओपीडी सेवा बंद रहने से करीब 9 हजार मरीज इलाज से वंचित रहे। साथ ही जो मरीज भर्ती हैं, उन्हें भी सही ढंग से खाना नहीं मिल रहा क्योंकि लगभग 200 खाना बनाने वाले कर्मियों में से 150 हड़ताल पर हैं। हॉस्पिटल अटेंडेंट के साथ ही सफाई कर्मचारी, किचन के स्टाफ और ऑफिस बियरर के एक साथ हड़ताल पर होने के कारण पीजीआई में हर तरफ व्यवस्था ध्वस्त नजर आई। सबसे ज्यादा असर सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। इमरजेंसी जैसे सेंसिटिव क्षेत्र में मरीज बायोमेडिकल वेस्ट के बीच इलाज करा रहे हैं। सभी भवनों की ओपीडी समेत ऑफिस के शौचालय गंदे पड़े हैं। जगह-जगह कूड़े का ढेर लगे हैं। पीजीआई प्रशासन के अनुरोध पर रोटरेक्ट, मानव रूहानी संस्था, सुख फाउंडेशन और सारथी कार्यकर्ता व्यवस्था को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को इमरजेंसी, ट्रॉमा, ओपीडी समेत अन्य विभागों में संस्थाओं के स्वयंसेवक झाड़ू लगाते, कचरा उठाते और ट्राॅली से कचरे को डंपिंग एरिया तक पहुंचाते नजर आए।

आज भी सिर्फ फाॅलोअप मरीजों का होगा पंजीकरण
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर विपिन कौशल ने बताया कि हड़ताल के दौरान पूर्व की तरह इमरजेंसी, ट्रामा और आईसीयू के सेवाएं चालू रहेंगी। इसके लिए आकस्मिक योजना लागू की गई है। वहीं, ओपीडी में सुबह 8 से 10 बजे तक सिर्फ फॉलोअप मरीजों का ही पंजीकरण होगा। नए मरीजों का पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

इस वजह से डाॅक्टर हैं हड़ताल पर
मंगलवार को पहले दिन दस रेजिडेंट डॉक्टर भूख हड़ताल पर बैठे। इनका साथ देने के लिए भी मंगलवार को कई डॉक्टर पहुंचे। भूख हड़ताल का फैसला डॉक्टरों ने कोलकाता के आरजी मेडिकल कालेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई दुर्घटना पर इंसाफ न मिलने पर लिया है। कोलकाता में कई डॉक्टर इंसाफ के लिए अनशन पर बैठे हैं, जिस कारण उनमें से कुछ डॉक्टरों की हालात काफी हद तक खराब हो गई है जिस कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया है। इतना हो जाने के बावजूद भी अभी तक कोई इंसाफ नहीं मिल पाया है। ऐसे में कोलकाता के डॉक्टरों का साथ देने के लिए पीजीआई के रेजिडेंट डाक्टर सोमवार और मंगलवार को 12 घंटे की भूख हड़ताल पर रहे।
हाईकोर्ट ने हड़ताल पर लगाई थी रोक
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर पीजीआई ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने 12 दिसंबर 2014 को आदेश जारी कर अनुबंधकर्मियों की व्यवस्था को समाप्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद पीजीआई पर इसे लागू करने का आदेश जारी हुआ लेकिन संस्थान को इस मामले में अंतरिम तौर पर मोहलत मिल गई थी। इसके बाद से ही लगातार अनुबंध कर्मचारी सेवा नियमित करने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले पीजीआई के कर्मचारियों ने हड़ताल की घोषणा की थी और तब हाईकोर्ट ने हड़ताल के आदेश पर रोक लगाते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि यूनियन पीजीआई की व्यवस्था में बाधा नहीं बनेंगी। पीजीआई चंडीगढ़ ने हाईकोर्ट को बताया कि सफाई कर्मचारी, सिक्योरिटी गार्ड, हॉस्पिटल अटेंडेंट व इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रेक्ट वर्कर यूनियन व इनकी ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने हड़ताल का निर्णय लिया था और परिसर में नारेबाजी आरंभ कर दी थी। पीजीआई के दखल के बाद 21 जनवरी को संस्थान व कर्मियों की बैठक हुई थी और इसके बाद 29 जनवरी को दोबारा बैठक हुई जिसमें कर्मियों ने अपनी मांगों को दोहराया। फिर कर्मचारी 8 अगस्त से हड़ताल पर चले गए और इससे ओपीडी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा था। हाईकोर्ट ने हड़ताल पर रोक लगाते हुए कहा था कि हम कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए।
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अब कर्मी दोबारा हड़ताल पर चले गए हैं लोगों को असुविधा न हो तथा पीजीआई का काम प्रभावित न हो इसके लिए जनहित याचिका दाखिल की गई है।
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