चंडीगढ़। आईटी पार्क की निजी कंपनी के प्रबंधक के अपहरण की कोशिश और मामले को रफा-दफा करने के लिए एक करोड़ मांगने के मामले में संदिग्ध आरोपी राजेश रोहिला की जमानत याचिका पर सीबीआई ने विशेश अदालत में अपना जवाब दायर किया है। सीबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मामले के आरोपी दिल्ली सीबीआई के चार अफसरों के साथ पांचवां शख्स हिसार का निवासी राजेश रोहिला था। मामले की जानकारी के लिए उसकी गिरफ्तारी और उससे पूछताछ करना जरूरी है। सीबीआई ने यह भी कहा कि इस साजिश में इनके साथ और भी लोग शामिल थे। उनके बारे में भी पता लगाना है, इसलिए रोहिला को जमानत न दी जाए। सीबीआई रोहिला को कई बार नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुला चुुकी है लेकिन वह पेश नहीं हुआ। रोहिला ने बीते बुधवार को इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए सीबीआई की विशेष अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। उसने अपनी याचिका में कहा है कि उसका इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है, सीबीआई उसे फंसाने की कोशिश कर रही है। रोहिला ने यह भी कहा है कि सीबीआई ने उसके घर, दुकान और रिश्तेदारों के घर छापेमारी की। रोहिला की याचिका पर 2 जून को फैसला सुनाया जाएगा।
ये है मामला
एक निजी कंपनी के प्रबंधक अभिषेक डोगरा की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। चंडीगढ़ सीबीआई ने दिल्ली सीबीआई के चार उपनिरीक्षकों सुमित गुप्ता, प्रदीप राणा, आकाश अहलावत और अंकुर कुमार को शिकायतकर्ता को धमकाने, फिरौती मांगने और अपहरण का प्रयास करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। शिकायत के अनुसार सभी उपनिरीक्षकों ने जबरन अभिषेक के दफ्तर में घुस कर पहले उसे धमकाया फिर उस पर आतंकवादियों को फंडिंग करने के आरोप लगाए। उन्होंने शिकायतकर्ता से मामले को रफा-दफा करने के लिए एक करोड़ रुपये देने की मांग रखी। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि इन चारों के साथ अन्य दो लोग भी शामिल थे जो अभी तक पकड़े नहीं गए हैं।