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Chandigarh News: नकद भुगतान होगा खत्म, अब चलेगा सिर्फ डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस

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चंडीगढ़। फास्टैग रिचार्ज में हेरफेर से सीख लेते हुए यूटी परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब नकद भुगतान की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है। परिवहन विभाग ने अन्य राज्यों को भी इस संबंध में जानकारी दे दी है। विभाग ने फैसला लिया है कि 12 नवंबर से आरएफआईडी टैग रिचार्ज के लिए केवल डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान स्वीकार किए जाएंगे।
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पहले यह रिचार्ज नकद में किया जाता था, जिसका फायदा उठाते हुए सीटीयू के ही एक सिक्योरिटी गार्ड राहुल और नियमित कर्मचारी जसविंदर सिंह ने करीब 50 लाख रुपये का हेरफेर किया था। इस घटना से सबक लेते हुए यूटी परिवहन विभाग ने आरएफआईडी टैग रिचार्ज के लिए कैश में भुगतान को खत्म करने का फैसला किया है। इस संबंध में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तर प्रदेश रोडवेज समेत पंजाब के कई निजी ऑपरेटर, जिनकी बसें आईएसबीटी-43 में आती हैं, उन्हें इस संबंध में सूचना भेज दी गई है। विभाग की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि 12 नवंबर से आरएफआईडी टैग रिचार्ज के लिए केवल डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान स्वीकार किए जाएंगे। आरटीजीएस के माध्यम से रिचार्ज कराने के लिए भुगतानकर्ता को चार से पांच दिन पहले संबंधित दस्तावेजों के साथ सूचना देनी होगी ताकि फास्टैग खाते में पेमेंट को अपडेट किया जा सके।
वित्तीय लेन-देन में बढ़ेगी पारदर्शिता
यूटी परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी। नकद भुगतान से होने वाली गड़बड़ियों से बचाव होगा और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहेगी। नकद के झंझट से बचने के कारण यूटी परिवहन विभाग और अन्य रोडवेजों के लिए काम आसान हो जाएगा। समय पर डिजिटल भुगतान होने के कारण टैग का रिचार्ज प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी होगी। सभी संबंधित परिवहन सेवाओं और बस ऑपरेटरों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से ही अपने आरएफआईडी टैग रिचार्ज कराएं।
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हाल ही में कर्मी ने लगाई थी 50 लाख की सेंध
आईएसबीटी-17 और आईएसबीटी-43 में चंडीगढ़ के अलावा बाहरी राज्यों की जो बसें खड़ी होती हैं, उन्हें पार्किंग फीस चुकानी पड़ती है। ये पैसे बसों पर लगे फास्टैग से कटते हैं। इस फास्टैग को रिचार्ज करने के लिए सीटीयू ने सेक्टर-17 में एक ऑफिस बनाया है, जहां नकद में भुगतान कर रिचार्ज कराया जाता है। यहां सीटीयू के कर्मी जसविंदर की ड्यूटी थी, जो दिन में आए पूरे पैसों को सिक्योरिटी गार्ड राहुल को देता था ताकि वह आईएसबीटी-43 के कैश ब्रांच में जमा कर दे। राहुल ने इसी कैश के साथ हेराफेरी की और जितना नकद जसविंदर सिंह उन्हें जमा करने के लिए देता था, कई बार उसके आधे तो कई बार पूरे पैसे ही जमा नहीं कराए और फर्जी रिसीविंग लाकर जसविंदर सिंह को थमा देता था। जसविंदर सिंह ने कभी ध्यान ही नहीं दिया कि रिसीविंग में कितने रुपये की एंट्री है। कई महीनों में ऐसे करके राहुल ने सरकारी खजाने को करीब 50 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया। हालांकि, कुछ दिनों पहले मामले का खुलासा होने पर राहुल को नौकरी से निकाल दिया है। विभाग का दावा है कि उन्होंने राहुल से पैसे वसूल कर सरकारी खजाने में जमा भी करा दिया है।

आरएफआईडी टैग रिचार्ज में नकद भुगतान को खत्म करने पर काम कर रहे हैं। अन्य राज्यों को इस संबंध में उपयुक्त जानकारी दी गई है। कैश की जगह डिमांड ड्राफ्ट और आरटीजीएस के माध्यम से ही भुगतान करने की व्यवस्था को लागू करने पर काम कर रहे हैं। -प्रद्युमन सिंह, निदेशक, परिवहन विभाग
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