चंडीगढ़। सेक्टर-8 स्थित मार्केट में बीते 17 जुलाई की रात को ईडी के डिप्टी डायरेक्टर के 17 वर्षीय बेटे मयंक की करंट से मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में पुलिस ने सेक्टर-3 थानेे में बीएनएस की धारा 106 के तहत अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। हालांकि, इस मामले में पहले ही गवर्नर की ओर से बिजली विभाग के एक्सईएन और एसडीओ को भी सस्पेंड किया जा चुका है क्योंकि इन अधिकारियों की ओर से खुले बिजली के तारों को ठीक नहीं करवाया गया था और ये अधिकारी पल्ला झाड़ रहे थे।
गौरतलब है घटना वाली रात जिम से निकलकर मयंक अपने घर आ रहा था। वह सेक्टर-8 के बाजार में पहुंचा तो वह बंद रास्ते पर लगी चार फीट ऊंची ग्रिल को पार कर रहा था। इसी बीच वह किनारे लगे ट्रांसफार्मर के खंभे से टकरा गया। खंभे से टकराते ही वहां लटकते तारों से करंट लग गया। हालांकि, आसपास मौजूद दुकानदारों ने डंडे के मदद से अलग कर सेक्टर-16 अस्पताल पहुंचाया, डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने पहले तो किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की और इत्तेफाकिया हादसे की कार्रवाई कर पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सौंप दिया था।
इस घटना के दो दिन बाद ही चंडीगढ़ प्रशासक एवं गवर्नर ने इस घटनास्थल पर मुआयना किया था। गवर्नर के साथ चंडीगढ़ के डीसी, एसएसपी सहित अन्य कई विभागों के अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान यहां ट्रांसफार्मर पर बिजली के खुले तार लटक रहे थे, जिनसे मयंक को करंट लगा था। खुले तारों को देखकर गवर्नर ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए बिजली विभाग के एसडीओ व एक्सईएन को सस्पेंड कर मामले में जांच के आदेश दिए थे। उधर, यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी का कहना था कि विभाग की कोई लापरवाही नहीं है। यह रास्ता भी बंद था। फिर भी मयंक ग्रिल पार कर दूसरी साइड आ रहा था जिस कारण उसे करंट लगा है। बिजली की कोई तार नीचे नहीं लटक रही थी लेकिन जब प्रशासक ने निरीक्षण किया तो तार लटक रहे थे।
धारा 106 सें सजा और जुर्माने का भी प्रावधान
वहीं, इस मामले में अब पुलिस की ओर से सेक्टर-3 थाने में एसआई कुलवंत सिंह की शिकायत पर बीएनएस की धारा 106 के तहत केस दर्ज किया गया है। यह आईपीसी की धारा 304 जी जगह बदली गई है जो कि केवल लापरवाही से संबंधित मामलों में लगती है। इस धारा में पांच साल तक सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। हालांकि, अदालत चाहे तो इस धारा के तहत दोषी पर यह दोनों सजा भी लगा सकती है। वहीं, पुलिस अब यह जांच करेगी कि जिस जगह करंट लगने वाली घटना हुई है, उस जगह खंभे पर तार को ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी थी।