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चंडीगढ़ : आत्मदाह का प्रयास करने वाले कर्मचारी और साथ देने वाले चौकीदार पर केस दर्ज, डीईओ ने दी थी शिकायत  

Sat, 10 Apr 2021 04:48 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • नौकरी जाने से परेशान कर्मचारी ने किया था डीईओ दफ्तर की छत पर आत्मदाह का प्रयास
  • जिला शिक्षा अधिकारी नीना कालिया ने पुलिस को दी शिकायत 
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चंडीगढ़ में युवक ने किया था आत्मदाह का प्रयास। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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चंडीगढ़ में तीन दिन पहले सेक्टर 19 स्थित डीईओ दफ्तर की छत पर नौकरी से निकाले गए कर्मचारी धनीराम ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया था। इस मामले में सेक्टर 19 थाना पुलिस ने कर्मचारी धनीराम और उसका साथ देने वाले सेक्टर 53 के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के चौकीदार रंजीत सिंह के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश करने और दंगा फैलाने की धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।  
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जिला शिक्षा अधिकारी नीना कालिया ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि बुधवार दोपहर करीब डेढ़ बजे फैदां का रहने वाला पूर्व कर्मचारी धनीराम कुछ लोगों के साथ बिना अनुमति के डीईओ दफ्तर में आकर छत पर चढ़ गया। इस दौरान वह खुद पर पेट्रोल छिड़ककर जोर जोर से चिल्लाने लगा कि वह आत्महत्या कर लेगा। शोर सुनकर दफ्तर के कर्मचारी छत की ओर भागे और धनीराम को यह सब करते देख कर्मचारियों ने उसे ऐसा करने से रोका। उन्हें इसकी सूचना मिली तो वह अपने दफ्तर से बाहर निकली और मामले को जानने की कोशिश की। 
 
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मारने के लिए मुक्का दिखाने का आरोप

आरोप है कि इस दौरान सेक्टर 53 के मॉडल हाई स्कूल के चौकीदार रंजीत सिंह ने उनके कर्मचारियों से बहस की। साथ ही उनकी शालीनता को चुनौती देकर उन्हें मारने के लिए मुक्का दिखाया। वह धनीराम को आत्मदाह करने के लिए लगातार उकसा भी रहा था। मीडिया कर्मियों के साथ मिलकर घटना की वीडियो भी बनाने लगा। शिकायत के आधार पर सेक्टर 19 पुलिस ने धनीराम और रंजीत के खिलाफ केस दर्ज किया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि रंजीत सिंह की भूमिका की छानबीन की जा रही है। 

यह था मामला 
फैदां के रहने वाले 26 वर्षीय धनीराम ने 7 अप्रैल को सेक्टर 19 स्थित डीईओ दफ्तर की छत पर खुद के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने का प्रयास किया था। 2011 में धनीराम सेक्टर 53 के सरकारी स्कूल में डीसी रेट पर ग्रुप में भर्ती हुआ था। 2015 में उसका तबादला सेक्टर 42 के सरकारी स्कूल में कर दिया गया और उसे बताए बिना ही ठेके पर रख लिया। तीन माह बाद उसकी तनख्वाह आई तो उसे पता चला कि उसे अब ठेके पर रख लिया गया है। इसको लेकर उसने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, सांसद, प्रशासक सभी को पत्र लिखे, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। नौ महीने पहले इसे नौकरी से निकाल दिया गया, जिसके बाद से यह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। इसके चलते उसने घटना को अंजाम दिया।
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