चंडीगढ़। डड्डूमाजरा निवासी महिला के नमूनों को कोरोना संक्रमित बताने वाली रिपोर्ट पीजीआई ने जारी की थी। वहीं अगले दिन ही जीएमसीएच-32 ने रिपोर्ट निगेटिव दे दी थी। अब सरकारी संस्थानों की कोरोना जांच प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है।
डड्डूमाजरा कॉलोनी निवासी मुकेश सिंह की पत्नी अनु सिंह (30) का इलाज पीजीआई में चल रहा है। पीजीआई में दिखाने के लिए तारीख मिली तो बताया गया कि अपनी कोरोना जांच कराएं। निगेटिव आने पर रिपोर्ट साथ लेकर आएं। निजी लैब में लापरवाही की खबरों के बाद मुकेश ने 12 मई को अपनी पत्नी की कोरोना जांच सेक्टर 16 स्थित अस्पताल में कराई। 13 मई को जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग व निगम की टीम मौके पर पहुंच गई। पूरे परिवार को एकांतवास में जाने के साथ ही कोरोना जांच कराने के निर्देश दे दिए। इधर, निगम की टीम ने दवा का छिड़काव शुरू कर दिया। मुकेश ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताया कि उन्हें कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, इसके बावजूद किसी ने नहीं सुना। मुकेश ने 14 मई को अपनी पत्नी को जीएमसीएच-32 में कोरोना जांच कराई। वहां रिपोर्ट निगेटिव आ गई। मुकेश को अपनी पत्नी का पीजीआई में इलाज कराना था इसलिए वह दोनों रिपोर्ट लेकर वहां पहुंच गया। दो अलग-अलग रिपोर्ट देख वहां भी काफी देर तक बहस हुई। बाद में डॉक्टरों ने मुकेश की बात को समझा और किसी तरह अनु का इलाज शुरू किया। इस संबंध में सेक्टर 16 अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. वीके नागपाल में जांच में पाया कि वह नमूने पीजीआई भेजे गए थे। वहां से मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।