भारतीय सेना में राजनीति होती है या नहीं। या किस स्तर पर होती है, ऐसी कोई चर्चा कभी सामने नहीं आई। लेकिन पंजाब विधानसभा चुनाव-2017 में एक मुकाबला ऐसा भी होने जा रहा है जहां दो पूर्व सैन्य अधिकारी आमने-सामने हैं।
पटियाला शहरी विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह भारतीय सेना में कैप्टन रह चुके हैं और शिअद ने उनके मुकाबले में देश के पहले सिख सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) जेजे सिंह को चुनावी जंग में उतार दिया है।
हालांकि पटियाला शहरी सीट पर हमेशा ही पटियाला शाही घराने का वर्चस्व रहा है और कैप्टन अमरिंदर सिंह जनरल जेजे सिंह को सीधी चुनौती दे रहे हैं कि इस बार एक कैप्टन जनरल को हरा देगा।
दूसरी ओर, कैप्टन की चुनौती को जनरल ने भी एक फौजी के अंदाज में ही लिया है। जेजे सिंह का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर शाही ठाठबाट के आदी हैं। जबकि वे एक सैनिक के पोते हैं, कैप्टन के बस की बात नहीं कि वह किसी जनरल को हरा दे।
एक नजर इस विधानसभा सीट के इतिहास पर डालें तो, पटियाला शहर में हिंदू वोटर अधिक हैं। पुराना होने के कारण यह शहर बेतरतीब ढंग से बसा है। शहर की तंग सड़कें और मौजूदा भीड़भाड़ शहर की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह जोकि पंजाब के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, 2012 में इस सीट से विधानसभा चुनाव जीते थे।
एक राजनीतिक मोर्चे का अनुभवी
कैप्टन
हालांकि बाद में उनके राज्यसभा जाने पर 2014 के उपचुनाव में उनकी पत्नी परनीत कौर विधायक चुनी गईं। कैप्टन अमरिंदर इस सीट पर तीन बार जीते हैं। लेकिन उन्होंने लोगों से जो वादे किए, उनमें से कई आज भी पूरे नहीं हुए हैं। इनमें मुख्य है - शहर में मल्टीस्टोरी पार्किंग बनाना। इ
सके अलावा कैनाल बेस्ड वाटर सप्लाई, मुख्य डंपिंग स्थल को शहर से बाहर शिफ्ट करना। कैप्टन की 2002, 2007 व 2012 की लगातार जीत और 2014 में परनीत कौर की जीत ने इस परिवार की यह धारणा बना दी है कि इस विरासती शहर पर हमेशा पटियाला शाही घराने का दबदबा कायम रहेगा और लोग शाही घराने को ही वोट देंगे।
यही कारण है कि कैप्टन 2017 का विधानसभा चुनाव भी इसी सीट से लड़ेंगे। दूसरी ओर, कैप्टन को इस चुनाव में जनरल जेजे सिंह की चुनौती कई मायनों में अलग है। कैप्टन अमरिंदर जहां पटियाला शाही घराने के वारिस हैं तो जनरल जेजे सिंह ने अपना बचपन पटियाला की गलियों में खेलकर बिताया है।
वे भी इस शहर से कैप्टन जितना ही लगाव रखते हैं। वैसे कैप्टन और जनरल दोनों लगभग एक ही समय सेना में भर्ती हुए थे। कैप्टन तो तीन साल बाद सेना से लौट आए लेकिन जनरल जेजे सिंह सेना प्रमुख बनने तक सेवा में बने रहे।
यानी कैप्टन के पास तो सियासी अनुभव बहुत है जबकि जनरल जेजे सिंह के पास बंदूक लेकर दुश्मनों का निपटाने का अनुभव है। फिर भी, राजनीतिक अनुभव की कमी के बीच वे अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर रह चुके हैं।
दूसरा दुश्मनों को निपटाने में माहिर
- फोटो : अमर उजाला
जाहिर है, वे चुनावी पैंतरों की भी ज्यादा समझ नहीं रखते लेकिन उन्हें टिकट देने वाली पार्टी शिअद बीते दस साल से पंजाब की सत्ता में है। कैप्टन के खिलाफ जेजे सिंह की जीत के लिए शिअद पूरी ताकत लगाएगी।
यह पहला मौका होगा जब एक कैप्टन के हाथों जनरल की हार होगी। - कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस प्रत्याशी
पटियाला सीट पर मैं अमरिंदर को बुरी तरह मात दूंगा और यह मेरे लिए एतिहासिक जीत होगी। - जनरल जेजे सिंह, शिअद प्रत्याशी
पटियाला अर्बन सीट
कुल वोटर - 140314
पुरुष -73852
महिलाएं - 66462
2012 विधानसभा चुनाव
प्रत्याशी पार्टी वोट मिले
कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस 66041
सुरजीत सिंह कोहली शिअद 23723
2014 विधानसभा उपचुनाव
प्रत्याशी ----------- पार्टी ----- वोट मिले
परनीत कौर -------- कांग्रेस ---- 52967
भगवान दास जुनेजा -- शिअद ---- 29685