पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को बरगाड़ी, कोटकपूरा गोलीकांड और अन्य मामलों की समयबद्ध जांच के लिए पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) की घोषणा की। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उनकी सरकार एसआईटी के निष्कर्षों और सिफारिशों के अनुसार बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई करेगी, ताकि निर्दोष पीड़ितों को न्याय मिल सके।
यह घोषणा विधानसभा में जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट पर बहस के दौरान ध्वनिमत से पारित किए गए उस प्रस्ताव के बाद हुई, जिसमें इन मामलों की सीबीआई जांच वापस लेकर पंजाब पुलिस को सौंपने की मांग की गई थी। विधानसभा में पंजाब सरकार ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के सदस्यों द्वारा उठाई मांग को स्वीकार करते हुए बेअदबी और बहिबल कलां गोलीकांड की सीबीआई को सौंपी गई जांच को वापस लेने का प्रस्ताव पारित कर दिया।
प्रस्ताव में कहा गया कि सभी सदस्यों का मानना है कि जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के बाद सीबीआई को मामला देने की जरूरत नहीं रह गई है। सदन में बहस के दौरान सभी सदस्यों का यह विचार था कि सीबीआई को जांच सौंपे जाने से यह मामला कई वर्षों तक लटका रहेगा, जिससे दोषियों को बच निकलने का मौका मिल सकता है। इस संबंध में ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने सदन में जस्टिस (सेवानिवृत्त) रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट और एटीआर पर बहस समाप्त करते हुए कहा कि पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल पर नरम होने का कोई सवाल नहीं था। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य शिअद नेताओं की इसलिए भी निंदा की कि उन्होंने बहिबल कलां और कोटकपूरा में पुलिस फायरिंग में घायल हुए लोगों से मिलना भी जरूरी नहीं समझा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घटनाओं के बाद जब घायलों से मिले थे, तभी उन्होंने फैसला कर लिया था कि वे घटना की पूरी तरह से जांच कराएंगे।