प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि पंजाबी सूबा बनने केबाद पंजाब और हरियाणा के बीच सभी संसाधनों का बंटवारा 60-40 के अनुपात में हुआ था। फिर पानी इस अनुपात में क्यों नहीं। पानी के बंटवारे में यह अनुपात उल्टा कर दिया गया, जिससे पंजाब के साथ बड़ा अन्याय हुआ है।
पत्रकारों से बात करते हुए कैप्टन ने कहा कि बंटवारे के बाद पंजाब को 105 लाख एकड़ जमीन और 8.5 एमएएफ पानी मिला। जबकि, हरियाणा को 80 लाख एकड़ जमीन और बारह एमएएफ पानी दे दिया गया। पानी अलॉट करते समय यमुना केपानी केबंटवारे पर फैसला नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम प्रकाश सिंह बादल पानी के मुद्दे पर दोहरा खेल खेलते हैं। सदन में पंजाब का एक बूंद पानी न जाने देने का शोर मचाते हैं। पर केंद्र में भाजपा से मिल कर हरियाणा समर्थन करते हैं।
विधानसभा में एसवाईएल की जमीन डी-नोटिफाई करने का बिल पास करवा कर बादल ने इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए नहीं भेजा। जबकि, कांग्रेस ने 2004 में बिल पास करवाने के बाद उसी दिन राज्यपाल की मंजूरी ले ली थी। शाम को बिल नोटिफाई हो गया था। बादल ने जानबूझ कर देरी की, जिससे सुप्रीम कोर्ट को आदेश जारी करने को पर्याप्त समय मिल गया।
बारह सौ लोगों में सिर्फ परनीत और रणइंदर का ही नाम क्यों
कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि बारह सौ लोगों में से केंद्र सरकार सिर्फ परनीत कौर और रणइंदर सिंह के ही स्विस बैंक अकाउंट का मुद्दा ही क्यों उठा रही है। उन्होंने कहा कि दोनों केनाम पर जो अकाउंट दिखाए जा रहे हैं, उनमें जीरो बैलेंस है।
कैप्टन ने एचएसबीसी बैंक की ओर से जारी पत्र दिखाते हुए कहा कि बैंक ने पांच साल पहले लिखा है कि इन दोनों नामों का कोई भी अकाउंट नहीं है। न ही वह किसी और अकाउंट में अधिकारिक सिग्नेटरी हैं। वह आयकर विभाग की शिकायत को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। क्योंकि वह किसी को भी ब्लैकमेल करने की इजाजत नहीं दे सकते।
कैप्टन न ेकहा कि चुनावी साल में उनकेपरिवार को बदनाम करने की साजिश है। कैप्टन ने एचएसबीसी, दुबई का पत्र दिखाते हुए कहा कि वहां जकरांडा ट्रस्ट और मुलवाला होल्डिंग्स का कोई अकाउंट नहीं है। कैप्टन ने कहा कि वह काफी पहले आयकर विभाग को ये दस्तावेज दे चुके हैं। पर चुनावी साल होने से अकाली-भाजपा इस मुद्दे को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं।
चन्नी केमामले में सुखबीर के बर्ताव की निंदा
कैप्टन अमरिंदर ने विधानसभा सदन में डिप्टी सीएम सुखबीर बादल द्वारा सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी केप्रति किए बर्ताव की निंदा की। उन्होंने कहा कि चन्नी ने अभी पदभार संभाला है, उसे परिपक्व होने में समय लगेगा। सुखबीर और उनकी पार्टी को चन्नी को बोलने और अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए था। संसद में जब भी किसी पार्टी का कोई सदस्य पहली बार बोलता है, तालियों से उसकी हौसलाअफजाई की जाती है।