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पीयू सीनेट चुनाव: उपराष्ट्रपति को कैप्टन का पत्र, लिखा- छह दशकों में पहली बार चुनाव में हुई देरी

Sat, 14 Nov 2020 02:17 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई
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पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव में हो रही देरी पर अब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी दखलअंदाजी दे दी है। उन्होंने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति और पीयू के चांसलर एम. वैंकेया नायडू को पत्र लिखकर कहा कि चंडीगढ़ में कोविड-19 के हालात भी अभी सामान्य है, ऐसे में चुनावों में हो रही देरी से यूनिवर्सिटी के सदस्यों के बीच नाराजगी पैदा हो रही है। बता दें कि दो हफ्ते पहले पीयू सीनेटरों ने चुनाव करवाने के लिए सीएम को पत्र लिखकर उनसे दखल देने की मांग की थी।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चांसलर से आग्रह किया कि वे पीयू में जल्द सीनेट चुनाव करवाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन और यूटी प्रशासन को सलाह दें, क्योंकि मौजूदा सीनेट का कार्यकाल 31 अक्टूबर को समाप्त हो गया है। ऐसे में यूनिवर्सिटी के सदस्यों के बीच नाराजगी पैदा हो गई है। साथ ही चुनावों में बेवजह देरी सुशासन और कानून के भी खिलाफ है।

 

पीयू प्रशासन की ओर से चुनाव रद्द करने के कारण पीयू के प्रोफेसर, तकनीकी सदस्यों, सीनेट और सिंडिकेट सदस्य निराश हैं। इसके अलावा पीयू में पंजाब के विधानसभा सदस्य और मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, कॉलेजों के डीपीआई, प्राचार्य आदि भी सदस्य हैं।

देश में संसद-विधानसभा के हो रहे चुनाव

पत्र में आगे लिखा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोविड-19 का हवाला देते हुए कहा गया है कि मौजूदा स्थिति चुनाव करवाने के अनुकूल नहीं हैं। जबकि अब स्थिति में सुधार आ रहा हैं। देश मे विभिन्न जगहों पर सांसद, विधानसभाओं, शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए चुनावों का आयोजन हो रहा है। सीएम ने कहा कि पीयू प्रशासन कोविड के दौरान चुनावों को लेकर बनाए गए दिशानिर्देशों का पालन करें और चुनाव आयोजित करें।

छह दशकों में पहली बार चुनाव में हुई देरी
मुख्यमंत्री कैप्टन ने बताया कि जब से विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है, हर चार साल के बाद इसकी सीनेट का गठन किया जाता है। इसमें सदस्यों का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है।

पिछले छह दशकों में नियमित रूप से अगस्त - सितंबर महीनों में चुनाव आयोजित किए गए थे। अजीब बात है कि इस बार पीयू प्रशासन ने सीनेट के लिए चुनाव आयोजित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सीनेट का गठन नहीं होने की स्थिति में पीयू सिंडिकेट का गठन भी नहीं किया जाएगा। मौजूदा सिंडिकेट का कार्यकाल भी 31 दिसंबर, 2020 को समाप्त हो जाएगा।
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पीयू में सुधार के लिए चुने गए प्रतिनिधियों की ली जाए राय

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीयू के विधियों और नियमों को ध्यान में रखते हुए हर चौथे वर्ष में लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले चुनावों को जल्द आयोजित करवाया जाए। अगर पीयू प्रशासन में कुछ सुधारों की आवश्यकता है तो वे चुने हुए प्रतिनिधियों की राय के साथ ही किए जाएं। सीनेट और सिंडिकेट की ओर से गठित सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ पीयू में प्रशासनिक तौर पर आवश्यक सुधार किए जाए।

विभाजन के बाद लाहौर की भरपाई के तौर पर पंजाब को मिली यूनिवर्सिटी
मुख्यमंत्री कैप्टन ने पत्र में जिक्र किया कि पंजाब विश्वविद्यालय अधिनियम, 1947 (1947 का अधिनियम VII) के तहत पंजाब विश्वविद्यालय का गठन किया गया था। 1947 में देश के विभाजन के बाद लाहौर में अपने मुख्य विश्वविद्यालय के नुकसान की भरपाई के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी।

1966 में राज्य के विभाजन के बाद पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 ने अपनी स्थिति बनाए रखी। जिसका अर्थ है कि विश्वविद्यालय का कार्य जैसा है वैसा ही जारी रहे, क्योंकि यह पंजाब के वर्तमान राज्य में शामिल क्षेत्रों पर अपना अधिकार क्षेत्र रखता था।
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