मुख्यमंत्री ने 1964 में पश्चिमी कमांड में जनरल अफसर कमांडिंग-इन-चीफ के एडीसी के तौर पर अपने निजी तजुर्बें का हवाला देते हुए कहा कि भारत का भरोसा जीतने के लिए पाकिस्तान को बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा तब हमें पश्चिमी सरहद से रोजाना गोलीबारी और गड़बड़ी की रिपोर्ट मिलती थीं, जैसे कि अब मिल रही हैं।
यह बात जरूरी है कि सिर्फ बाजवा नहीं, बल्कि पाकिस्तानी सेना का समूचा नेतृत्व भारत के साथ शांति का रास्ता अपनाए और अतीत की बातें भुलाने वाले विचार के पक्ष में आए। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी दोनों मुल्कों के बीच अमन के रास्ते में रुकावट नहीं पैदा की, जबकि पाकिस्तान ने हमेशा रोड़े बिछाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के अमन प्रस्तावों पर भारत तब ही यकीन कर सकता है, जब इन सवालों का जवाब मिल जाए कि क्या वहां सभी जनरल बाजवा के विचारों के साथ इत्तफाक रखते हैं? क्या वह सभी आतंकवादी संगठनों की हर प्रकार की मदद से तत्काल हाथ खींचते हैं? क्या वह आईएसआई को भारत में सभी गतिविधियां बंद करने के लिए कह सकते हैं? अमन के लिए कोई शर्त न होने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति का हिमायती रहा है और सभी भारतीय अमन चाहते हैं लेकिन भारत अपनी सुरक्षा और अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं कर सकता।