वत्तीकुटी टेक्नोलॉजिस की ओर से निर्मित सर्जिकल रोबोट पहली बार भारत में हेड व नेक सर्जरी के लिए कैडावरिक रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल किया जाएगा। मैग्नीफाइड 3डी इमेजिंग की मदद से कैंसर का आसानी से इलाज किया जा सकेगा। यह तकनीक गले की सर्जरी जैसे कि वायस बॉक्स सर्जरी, थायरड के केसों में मरीज के मुंह से होते हुए रोबोटिक आर्म्स आसानी से बिना कोई दाग छोड़े सर्जरी कर देता है। ट्रांसोरल रोबोटिक सर्जरी व टीओआरएस तकनीक की वजह से पीजीआई अब देश के कुछ गिनेचुने अस्पतालों में आकर खड़ा हो गया है।
ईएनटी विभाग के हेड प्रोफेसर अशोक गुप्ता ने बताया कि द विंसी सर्जिकल रोबोट की मदद से सैकड़ों सर्जन लाइव हेड व नेक कैंसर की रोबोटिक सर्जरी न सिर्फ देख सकते है बल्कि यह भी समझ पाएंगे कि इससे मरीजों को कितना फायदा हो सकता है। रोबोटिक सर्जरी की मदद से जिन अंगों पर पहले पहुंचा नहीं जा सकता था, उनकी भी सर्जरी हो सकती है और गले में कैंसर के टिशूज को आराम से देखकर उसका इलाज कर सकते हैं।
पीजीआई देश में पहली बार तीन दिवसीय नेशनल रोबोट असेस्टिड हेड व नेक वर्कशॉप एंड एडवांस्ड ईएनटी सर्जिकल अपडेट के तहत 300 ईएनटी सर्जन को आधुनिक तरीकों से कम से कम इंसीजन यानी कट से सर्जरी कर दिखाया जाएगा। देश भर से ईएनटी सर्जन शिरकत कर रहे हैं। यह मीट 21 अप्रैल से लेकर 22 अप्रैल तक पीजीआई में आयोजित की जा रही है। पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग में वर्ष 2014 से सर्जिकल रोबोट से सर्जरी की जा रही है। इसके साथ ही इस सुविधा का उपयोग हाल ही में गायनोकोलॉजी कैंसर के मरीजों के साथ साथ ईएनटी मरीजों की सर्जरी नो ट्रेंड रोबोटिक सर्जनस द्वारा की गई है।