डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से कामागाटा मारू हादसे पर माफी मांगने के एलान का स्वागत किया है। ट्रूडो ने 18 मई को हाउस ऑफ कॉमन्स में प्रस्ताव रख कर इस दुखद घटना पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का एलान किया है। सुखबीर ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए सराहना की है।
ट्रूडो ने सोमवार को ओटावा विधानसभा में बैसाखी की पूर्व संध्या पर आयोजित खालसा साजना समागम के दौरान यह एलान किया था। सुखबीर ने कहा कि यह खुशी की बात है कि कनाडा सरकार ने कामागाटा मारू प्रकरण पर संसद में माफी मांगने की बात कही है। 1914 की इस घटना की वजह से सिख समुदाय खुद को आहत महसूस करता आया है। डिप्टी सीएम ने अब तक के महान सिखों में से एक बाबा गुरदित्त सिंह को याद किया, जिन्होंने हांगकांग में फंसे पंजाबियों को बचाने के लिए कामागाटा मारू नामक जापानी जहाज किराए पर लिया था।
स्वतंत्रता संग्राम केदौरान ब्रिटिश भारत से कनाडा के लिए आव्रजन के रास्ते खोलना चाहते थे। वर्ष 1914 में यह जहाज हांगकांग से चलकर जब वैंकुवर तट पर पहुंचा तो कनाडा सरकार ने ब्रिटेन के दबाव में आकर जहाज को लंगर डालने की अनुमति नहीं दी। इसमें कुल 372 लोग सवार थे जिनमें से 340 सिख थे। वापसी पर कोलकाता के तट पर ब्रिटिश सेना ने इसमें सवार 19 लोगों को मार गिराया था।
पंजाब विस में पारित हुआ था प्रस्ताव
सुखबीर ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल लंबे समय से कनाडा की संसद में औपचारिक माफी मांगने की मांग करता आया है। 26 मई 2015 को पंजाब विधानसभा में भी इस त्रासदी के लिए कनाडा की संसद से माफी की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया था।