पंजाब यूनिवर्सिटी में ट्रैफिक कंट्रोल को लेकर किए गए दावों की पहले ही दिन हवा निकल गई। नो व्हीकल जोन में वाहन ही वाहन खड़े नजर आए। दिलचस्प बात यह है कि अन्य दिनों की अपेक्षा इस प्रतिबंधित क्षेत्र में अधिक फोर व्हीलर्स खड़े दिखे। इन व्हीकल चालकों को जागरूक करने के लिए न तो पीयू प्रशासन के जिम्मेदार लोग पहुंचे और न ही छात्रों की कमेटी बनाई गई। ट्रैफिक कंट्रोल को लेकर तीन माह में आठ से अधिक बैठकें की गईं। कमेटी पर कमेटियां बनाई गईं। इसके अलावा पुराने निर्णयों को पलटा गया।
वीरवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि शुक्रवार से हॉस्टलों के सामने खड़े होने वाले फोर व्हीलर चालकों को जागरूक किया जाएगा। वहां से वाहन हटवाकर पार्किंग में लगाने को कहा जाएगा। इसके लिए पीयू प्रशासन के कुछ लोगों को पहल करनी थी। साथ ही हर हॉस्टल के पांच से छह छात्रों की कमेटी बनाई जानी थी जो चालकों को यह ज्ञान बांटती। शुक्रवार से इन निर्णयों पर अमल होना था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। गेट नंबर एक से लेकर डिस्पेंसरी तक फोर व्हीलर वाहनों की संख्या सर्वाधिक रही। सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े मिले।
कई गाड़ी चालकों ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं कि यहां वाहन खड़े नहीं करने हैं। उन्हें कोई बताने तक नहीं पहुंचा। हॉस्टल नंबर एक से तीन के मध्य 30 से 40 फोर व्हीलर खड़े मिले। यही हाल हॉस्टल नंबर चार से लेकर सात तक रहा। जानकारों का कहना है कि पीयू प्रशासन हवा में निर्णय लेता है, लेकिन उस पर अमल नहीं करता।
फोटो खिंचवाने के लिए आए कुछ छात्र नेता
हॉस्टलों के बाहर खड़े वाहनों को हटवाया तो नहीं गया, लेकिन कुछ छात्र नेता फोटो खिंचवाने जरूर दिखे। ये नेता तीन से चार मिनट ही रुके। उन्होंने न तो किसी को जागरूक किया और न ही अन्य कार्य। इससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मीडिया में फोटो आ जाए, इसलिए वह यहां पहुंचे थे।
फोर व्हीलर जागरूकता के लिए सोमवार से बड़े स्तर पर कार्यक्रम चलेगा। छात्रों की कमेटियां बनाई जा रही हैं। धीरे धीरे परिसर में वाहन कम होते नजर आएंगे।
- इमैनुअल नाहर, डीएसडब्ल्यू