पुलवामा के शहीदों की याद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया और उसमें सांसद अनुराग ठाकुर कांग्रेस के घोटाले गिनाने लगे, फिर जमकर सियासी तीर चले। पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ ऑडिटोरियम में शुक्रवार को ‘शहादत का सम्मान’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। राजनीतिक कार्यक्रम न होने के बावजूद मुख्य अतिथि सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के घोटालों, अरविंद केजरीवाल, कन्हैया कुमार से लेकर राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल के समय का जीप घोटाला, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड समेत तमाम घोटालों का जिक्र किया। इस कार्यक्रम में अनुराग ठाकुर के साथ एबीवीपी के नॉर्थ के संगठन मंत्री विक्रांत खंडेलवाल, प्रो. देविंदर सिंह, पीयू इकाई के अध्यक्ष कुलदीप पंघाल और एबीवीपी के सेक्रेटरी परविंदर सिंह भी मौजूद रहे।
सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू देश को इकट्ठा नहीं कर पाए, जो सरदार पटेल ने कर दिखाया। नेहरू को जम्मू-कश्मीर का जिम्मा मिला, उसे भी उन्होंने स्पेशल राज्य का दर्जा दे दिया। इस गलती की सजा आज पूरा देश भुगत रहा है। उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग खाते तो देश का हैं लेकिन राग पाकिस्तान का अलापते हैं।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल दिल्ली में सरकार चलाते हैं लेकिन देश के टुकड़े करने की बात करने वालों के साथ खड़े दिखाई देते हैं। जेएनयू में आतंकी अफज़ल गुरु, याकूब मेमन को शहीद बताया गया। कांग्रेस भी साथ खड़ी हो गई।
शहादत के सम्मान में एसएफएस को छोड़ सभी छात्र संघ हुए एकजुट
कार्यक्रम का उद्देश्य पुलवामा अटैक में शहीद जवानों के परिवार के लिए फंड एकत्रित करना और उनको सम्मान देना था। एबीवीपी की पहल में एसएफएस को छोड़ सभी छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया, जिनमें एनएसयूआई, सोई, आईएसए, एलएसयू, पूसू, एचएसए व हिमसू शामिल रहे। अनुराग ने इस पर निशाना भी साधा।
अगुराग ठाकुर की अगुवाई में तिरंगा मार्च
कार्यक्रम के बाद लॉ ऑडिटोरियम से स्टूडेंट सेंटर तक एक पैदल तिरंगा मार्च निकाला गया। वंदे मातरम, भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के खूब नारे लगाए गए। स्टूडेंट सेंटर पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई और दो मिनट का मौन रखा गया।
नाटक के माध्यम से दिखाया गया, शहादत के बाद कैसा था घर का माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत में संवाद थिएटर ग्रुप की तरफ से नाटक का मंचन किया गया, जिसका नाम था- बस अब और नहीं। नाटक में दिखाया गया कि शहादत के बाद जवानों के घर में कैसा माहौल था। साथ ही यह भी संदेश देने की कोशिश की गई कि जवानों की शहादत पर भी राजनेता राजनीति करने से बाज नहीं आते है और वह तुरंत शहीदों के परिजनों के घर पहुंच उन्हें अगले चुनावों में जिताने की मांग करने लगते है।