चंडीगढ़ व पंजाब के लाखों विद्यार्थियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके ही कॉलेज में उन्हें लाखों किताबें एक क्लिक पर मुफ्त में पढ़ने को मिलेंगी। यही हाल देश के अन्य राज्यों के विद्यार्थियों का भी है। इसका खुलासा जीजीडीएसडी कॉलेज बनूर में लाइब्रेरियन के पद पर तैनात डॉ. शिवानी कौशल ने अपने रिसर्च में किया है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि यदि विद्यार्थियों को किताबों के एक प्लेटफार्म के बारे में जानकारी दी गई तो निश्चित ही देश के ज्ञान में बड़ी वृद्धि होगी।
छह साल में पूरा हुआ रिसर्च, चौंकाने वाले तथ्य आए सामने
वर्ष 2010 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से नेशनल लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर स्कॉलरली कंटेट (एनलिस्ट) प्लेटफार्म शुरू किया गया था। इस मंच के जरिये हर सरकारी, सहायता प्राप्त कॉलेजों को सदस्यता लेनी थी। पांच हजार रुपये सालाना शुल्क निर्धारित किया गया था। सदस्यता के बाद कॉलेज की ओर से फैकल्टी व विद्यार्थियों को एक ईमेल आईडी व पासवर्ड जारी करना था ताकि वह उसके जरिये लाखों किताबों को खोलकर पढ़ सकें।
प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद तीन साल बाद वर्ष 2013 में मंत्रालय ने एनलिस्ट पर रिसर्च करने का जिम्मा जीजीडीएसडी कॉलेज बनूर की लाइब्रेरियन डॉ. शिवानी कौशल को सौंपा। उनके रिसर्च में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डॉ. शिवानी ने यह रिसर्च पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इनफॉर्मेशन साइंस के डॉ. रूपक चक्रवर्ती की गाइडेंस में किया।
एनलिस्ट प्लेटफार्म को लेकर कॉलेज नहीं दिखे गंभीर
चंडीगढ़ व पंजाब में 200 कॉलेज हैं। इन कॉलेजों के हजारों विद्यार्थियों से संपर्क किया। पता लगा कि 32 कॉलेजों के पास ही एनलिस्ट की सदस्यता है, लेकिन इसमें से महज दस कॉलेजों के विद्यार्थियों को ही किताबें पढ़ने के लिए सुविधाएं दी गई हैं। बाकी विद्यार्थियों को इस योजना की जानकारी तक नहीं है। यहां तक की कॉलेज भी इसको लेकर गंभीर नहीं दिखे। एक दर्जन से अधिक कॉलेज ऐसे मिले जो सदस्यता लेकर ही भूल गए हैं कि इसका लाभ विद्यार्थियों को भी दिया जाना है।
ये दिए गए सुझाव
- ई रिसॉर्सेज की मार्केटिंग बड़े पैमाने पर करनी होगी
- हर कॉलेज में विद्यार्थियों को कार्यशाला के जरिये इसके बारे में ट्रेंड करना होगा
- हर कॉलेज को इसकी सदस्यता लेने के लिए बाध्य करना होगा ताकि फैकल्टी व विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।
- वित्तविहीन कॉलेजों से लिया जा रहा सदस्यता शुल्क कम किया जा सकता है।
- किताबों व प्लेटफार्म को समय समय पर सब्सक्राइब करना होगा।
- स्टूडेंट कॉलेज में इस प्लेटफार्म की सदस्यता की मांग करें।
एनलिस्ट का लाभ कितने विद्यार्थियों को मिला, इस पर रिसर्च किया तो कई जानकारी चौंकाने वाली बातें सामने आईं। विद्यार्थियों को इस प्लेटफार्म की जानकारी तक नहीं है। इसके लिए उन्हें जागरूक करना होगा ताकि लाखों किताबें मुफ्त में पढ़कर वह अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकें।
- डॉ. शिवानी कौशल, लाइब्रेरियन, जीजीडीएसडी कॉलेज बनूर