Punjab University VC Arun Grover
पैसे की कमी से जूझ रही पंजाब यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के बजाय दूसरा विकल्प तलाशा गया है। अब पीयू को इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपोरटेंस का दर्जा दिलाने के लिए काम होगा क्योंकि ज्यादातर कॉलेज पीयू को सेंट्रलाइज्ड दर्जा दिलाने के हक में नहीं हैं। वहीं पीयू प्रबंधन पहले ऐसा चाहता था, लेकिन अब नए विकल्प पर काम शुरू कर दिया गया है। सेंट्रलाइज्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने और उस पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक कमेटी बनी थी, जिसकी बुधवार को बैठक हुई।
बैठक के बाद तय किया गया कि अगर पीयू को बचाना है तो सेंट्रलाइज्ड दर्जा नहीं, तो इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपोरटेंस में शामिल करने पर काम किया जाए और इसके लिए पैरामीटर तलाशे जाएं। हालांकि पीयू ने सेंट्रल स्टेटस के लिए पैरामीटर तय किए थे, जिसमें अब नई संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बैठक में तय हुआ कि मौजूदा पैरामीटर इतने मजबूत नहीं हैं कि सिंडिकेट या सीनेट में वोटिंग कराई जा सके। लिहाजा प्रपोजल इतना मजबूत हो कि दोनों जगह वोटिंग कराई जा सके।
पीयू के पैरामीटर
पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए कुछ पैरामीटर बनाए गए, लेकिन चूंकि अब इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इंपोरटेंस के लिए पैरामीटर तलाशने हैं, तो उसमें पुरानों को भी शामिल किया जाएगा। पीयू के कुछ मजबूत पैरामीटर इस प्रकार हैं-
- पीयू की अलुमनी काफी मजबूत है।
- पीयू के फंड्स का बड़ा हिस्सा केंद्र से ही आता है।
- पीयू पहले से ही इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेट है। यूनिवर्सिटी को चलाने का मौजूदा स्ट्रक्चर सेंट्रल यूनिवर्सिटी से काफी हद तक मेल खाता है।
- यूटी होने के नाते चंडीगढ़ सेंट्रल यूनिवर्सिटी ले सकता है।
- पीयू में दाखिला, एंट्रेंस टेस्ट और भर्ती पहले से ही नेशनल लेवल की है।