शिक्षा निदेशक रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने बताया कि हर वर्ष ग्यारहवीं के दाखिले के दौरान मारामारी रहती है। अतिरिक्त सीट बढ़ाने के बावजूद कई सारे विद्यार्थियों को दाखिला नहीं मिल पाता। इन सभी स्थितियों को देखते हुए सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है। छह में से दो स्कूलों के नाम तय कर दिए हैं। इनमें रायपुरकलां व मलोया स्कूल के नाम शामिल हैं। इन स्कूलों में अभी सिर्फ आर्ट्स से संबंधित विषय रखे जाएंगे। विज्ञान की सीट बढ़ाने पर फैसला नहीं लिया है, क्योंकि इसके लिए प्रयोगशालाओं की भी संख्या बढ़ानी पडे़गी।
लड़कियों के लिए 25 फीसदी कोटा तय करने पर विचार
शिक्षा निदेशक बराड़ ने बताया कि ग्यारहवीं कक्षा में कम अंक होने पर दूर का स्कूल मिलने पर लड़कियों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। इस कारण कई बार अभिभावक लड़कियों को स्कूल भेजने के पक्ष में भी नहीं दिखते। इसलिए इस बात पर विचार किया जा रहा है कि लड़की ने जिस स्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई की है, उसे उसी स्कूल में दाखिला मिल जाए। इसके लिए 25 फीसदी कोटा तय करने पर विचार किया जा रहा है।
आंकड़ों पर एक नजर
- 1000 के करीब नई सीटें बढ़ जाएंगी
- 40 सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल हैं चंडीगढ़ में
- 12800 के करीब सीटें हैं 11वीं में
- 16000 के करीब हर साल आते हैं आवेदन
- 4000 के करीब विद्यार्थी दाखिले से रह जाते थे वंचित