पंजाब यूनिवर्सिटी वीसी प्रो. राजकुमार ने उन शिक्षकों को प्रमोशन का तोहफा दिया है, जिनके केस विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी ने पास कर दिए थे, लेकिन किन्हीं कारणों से रुके हुए थे। इन शिक्षकों के आवेदनों की जांच भी अब सिंडिकेट की कमेटी नहीं करेगी। प्रमोशन पाने वाले शिक्षकों की संख्या दर्जनों में है। इससे शिक्षकों में खुशी की लहर है। वीसी के अलावा सिंडिकेट व सीनेट ने भी इन शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखा है। उन्होंने भी शिक्षकों को प्रमोशन देने की सिफारिश की थी। शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर यूजीसी ने वर्ष 2018 में नई गाइड लाइन जारी की थी।
साफ निर्देश थे कि जून से प्रमोशन के लिए नए सिरे से आवेदन होंगे। उसी तिथि के आसपास कई शिक्षकों ने प्रमोशन के लिए आवेदन किए थे। इसमें साइंस, आर्ट्स आदि विषयों के शिक्षक शामिल थे। आवेदन के बाद इन शिक्षकों के अभिलेख आदि की जांच विभागीय स्क्रीनिंग कमेटी ने की थी, लेकिन कुछ समय बाद पेच लग गया कि इन्हें नई गाइड लाइन के मुताबिक प्रमोशन का लाभ मिलेगा। दोबारा आवेदन करने होंगे। साथ ही सिंडिकेट की स्क्रीनिंग कमेटी भी इनके आवेदन देखेगी। यह मामला सिंडिकेट व सीनेट में भी पहुंचा।
वहां कई मेंबर्स ने यह प्रकरण प्रमुखता से उठाया। बहुमत के बाद इस पर वीसी को निर्णय लेने को कहा गया था। सूत्रों का कहना है कि वीसी ने सभी नियमों व सिंडिकेट और सीनेट की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए इन दर्जनों शिक्षकों को प्रमोशन का लाभ दे दिया है। इन शिक्षकों के आवेदनों की जांच दोबारा नहीं होगी। दूसरी कड़ी में उन शिक्षकों को लाभ दिया जाएगा, जिनके प्रोजेक्ट दो से तीन साल में पूरे होने वाले होंगे। उसके लिए यूजीसी ने गाइड लाइन में प्रयुक्त किए शॉर्टली शब्द की परिभाषा पीयू के पास नहीं है, इसके लिए यूजीसी को चिट्ठी लिखकर पूछा गया है।
पुटा ने भी चिट्ठी लिखी है। शिक्षकों के प्रमोशन के आदेश जैसे ही बुधवार की देर शाम सार्वजनिक हुए तो शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने वीसी समेत सिंडिकेट व सीनेट के मेंबर्स का आभार जताया है। क्योंकि ये शिक्षक नियमों का हवाला देकर प्रमोशन पाए हैं। कुछ शिक्षक प्रमोशन पहले पा चुके हैं, लेकिन उन्हें ग्रेड पे नहीं मिला है, उन्हें यह लाभ भी मिलेगा।