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खुलासाः पीयू की 48 साल पुरानी 'पुटा' रजिस्टर्ड ही नहीं, सिंडिकेट ने दी है संचालन की अनुमति

Fri, 26 Jul 2019 03:15 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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पंजाब यूनिवर्सिटी की टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) को पूरे देश के शिक्षण संस्थान बखूबी जानते हैं। इसकी रेपुटेशन भी काफी है। लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि पुटा का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। यह केवल सिंडिकेट की मेहरबानी से संचालित किया जा रहा है। लगभग 48 साल से पीयू सिंडिकेट ने इसके संचालन की अनुमति दे रखी है। बुद्धिजीवियों को यह तरीका ठीक नहीं लगा। उनका कहना है कि पुटा का प्रभाव पूरे देश में है, ऐसे में इसे रजिस्टर्ड होना चाहिए। अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ यह हैरत की बात है।
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हालांकि कुछ शिक्षकों ने सुझाव दिया है कि अभी भी पुटा का रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। पंजाब यूनिवर्सिटी के अन्य संगठनों ने रजिस्ट्रार सोसाइटी सेक्टर- 17 से मान्यता ली है। वहां से जारी रजिस्टर्ड नंबर के बाद ही एसोसिएशन का संचालन कर रहे हैं। अन्य कर्मचारी संगठन हो या फिर संस्थाएं, रजिस्ट्रार सोसाइटी के यहां नियमत: पंजीकरण लेती हैं। यदि कोई गड़बड़ी भी होती है तो रजिस्ट्रार सोसाइटी के जरिये कार्रवाई भी अमल में लाई जाती है। संगठन का रजिस्ट्रेशन कैंसिल तक भी होता है।

पीयू के जानकारों के मुताबिक 1970 से पुटा का संचालन हो रहा है। 48 साल से अधिक समय संगठन को चलते हो गया, लेकिन अब तक किसी ने इसके रजिस्ट्रेशन की जहमत नहीं उठाई। अब सदस्यता शुल्क पुटा ने बढ़ा दिया तो इसका खुलासा कुछ शिक्षकों ने किया है। बताया जाता है कि बिना रजिस्ट्रेशन के पुटा अपना विस्तार नहीं कर पा रही। रजिस्ट्रेशन में कोई मेहनत भी नहीं है। महज आधे से एक घंटे में रजिस्ट्रेशन मिल जाता है। मालूम हो कि पुटा से लगभग 650 शिक्षक जुड़े हैं।
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हर साल यह 200 रुपये सदस्यता शुल्क दे रहे थे, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 500 कर दिया गया। अब शिक्षकों को अचानक पता लगा कि जिस एसोसिएशन को वह शुल्क दे रहे हैं वह रजिस्टर्ड नहीं है। सूत्रों का कहना है कि अब कई शिक्षकों ने मन बनाया है कि वह शुल्क नहीं देंगे। पुटा रजिस्ट्रेशन को लेकर कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि यह पीयू का आंतरिक मामला है। इसलिए सिंडिकेट व सीनेट से ही अप्रूव लेना काफी है, लेकिन देखना है कि पुटा का रजिस्ट्रेशन अब कब तक होता है। इस संबंध में पुटा अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल ने बयान देने से इंकार किया है।

पुटा की जूनियर विंग बनेगी

शिक्षकों का कहना है कि पुटा में सीनियर प्रोफेसर हैं जो असिस्टेंट प्रोफेसर की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते। इसको ध्यान में रखकर पुटा की जूनियर विंग बनाने की तैयारी चल रही है। प्रो. जगदीश राय कहते हैं कि ऐसा कोई प्रस्ताव आएगा तो वह इसका समर्थन करेंगे। शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण होना चाहिए।

मालूम हो कि डेंटल कॉलेज के शिक्षकों ने शुल्क देने से इंकार कर दिया है। अन्य विभाग भी इसी रास्ते चलने को तैयार हैं। सूत्रों का कहना है कि पुटा के दो फाड़ हो सकते हैं। कुछ शिक्षक मिलकर दूसरा रजिस्टर्ड संगठन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए वीरवार को कुछ शिक्षकों ने गोपनीय बैठक भी की है।

सैलरी कटौती के लिए पीयू ने मांगी कानूनी राय
पुटा के सदस्यता शुल्क के लिए शिक्षकों के वेतन से कटौती करने का मामला धीमा पड़ गया है। अमर उजाला ने पीयू प्रशासन को आइना दिखाया तो इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डीपीएस रंधावा ने सेलरी कटौती को गलत माना है।

उनके स्टेटमेंट के बाद किसी प्रकार की कोई गुंजाइश नहीं बचती, लेकिन पीयू फिर से कानूनी राय लेने में जुटा है। बताया जाता है कि शिक्षकों को राहत मिल सकती है। कानूनी रूप से यह भी देखा जाएगा कि बिना रजिस्ट्रेशन वाला संगठन शिक्षकों से सदस्यता शुल्क ले सकता है या नहीं।
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क्या कहते हैं जानकार

पुटा के पूर्व अध्यक्ष मुहम्मद खालिद कहते हैं कि पुटा की वैल्यू बहुत है। इसका रजिस्ट्रेशन नहीं है लेकिन सिंडिकेट से इसका संचालन हो रहा है। वहीं सीनेटर डॉ. अजय रंगा कहते हैं कि अभी भी समय है, पुटा का रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए और इसका विस्तार किया जाना चाहिए।

पुटा को इन एसोसिएशन से लेनी चाहिए सीख
पंजाब यूनिवर्सिटी स्टाफ एसोसिएशन ने अपना विस्तार समूचे पंजाब में किया है। रीजनल सेंटर मुक्तसर, कोहनी, लुधियाना, होशियारपुर आदि के कर्मचारी इसके मेंबर हैं। साथ ही कॉलेजों के कर्मचारी भी जुड़े हैं। कुल 1100 मेंबर हैं। दिलचस्प है कि महज 10 रुपये कर्मचारियों से हर साल सदस्यता शुल्क लिया जाता है।

इसी तरह एससी, बीसी, एसटी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने 1999 में रजिस्ट्रार सोसाइटी के यहां रजिस्ट्रेशन करवाया था। इसके 350 मेंबर हैं। इनका भी सदस्यता शुल्क सालाना दस रुपये ही है। वहीं पुटा के सदस्यों की संख्या 650 है और सदस्यता शुल्क इस बार बढ़ाकर 500 कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि अपने ही कर्मचारियों से पुटा को सीखना चाहिए था। बढ़ा हुआ शुल्क वापस होना चाहिए।
 
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