पंजाब विश्वविद्यालय की सिंडिकेट ने लाखों विद्यार्थियों को बड़ी राहत दी है। हर कोर्स में पांच फीसदी फीस बढ़ाए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। वहीं यह आदेश भी जारी कर दिया गया कि हर कक्षा में बढ़ने वाली दस फीसदी सीटें भी नहीं बढ़ेंगी। केवल नए कोर्स में सीटें बढ़ाने की अनुमति दी गई।
पंजाब के कॉलेजों में पढ़ रहे एससी-एसटी के विद्यार्थियों की डिग्रियां देने का पहला रास्ता साफ हो गया है। उन विद्यार्थियों को डिग्रियां जारी कर दी जाएंगी, जो फीस जमा कर देंगे। बाकी विद्यार्थियों को डिटेल मार्क्स दिए जाएंगे, लेकिन उसके लिए हर विद्यार्थी की डिफाल्ट रिपोर्ट की जांच होगी। यह मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो सिंडिकेट में इसको लेकर काफी बहस हुई और छात्रों को कुछ राहत प्रदान की गई।
नहीं आएगा सीनेट का विशेष सत्र
सिंडिकेट की बैठक में सीनेट का विशेष सत्र बुलाने के प्रस्ताव पर काफी बहस हुई। सदस्य डॉ. केके शर्मा ने कहा कि 19 सीनेट सदस्यों ने री-अप्वाइंटमेंट के मुद्दे पर सीनेट की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। इस पर काफी बहस हुई, लेकिन सिंडिकेट के एक पक्ष का दबदबा होने के कारण यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया।
डॉ. केके शर्मा ने लिखित में दिया कि वह सिंडिकेट के इस निर्णय के खिलाफ हैं। यह पीयू व यूजीसी के नियमों के खिलाफ है। सीनेट सदस्य डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र के खिलाफ है। पीयू कुछ लोगों के शिकंजे में आ चुका है। मामले में चांसलर से शिकायत की जाएगी। डीएवी कॉलेज पर लिया गया निर्णय भी गलत है।
खाली रहीं एनआरआई सीटों पर होंगे लोकल विद्यार्थियों के दाखिले
सभी कोर्स में एनआरआई के लिए सीटें निर्धारित हैं, लेकिन कई बार वह खाली रह जाती हैं। ऐसी स्थिति में उन सीटों को भरने के लिए सिंडिकेट ने रास्ता बता दिया। कहा गया कि यदि सीटें खाली रहती हैं तो उन पर लोकल विद्यार्थियों के दाखिले किए जा सकते हैं। इडीयूआई प्रो. शंकर जी झा को एक साल का एक्सटेंशन दिया गया।
निकाले गए शिक्षकों को वापस बुलाएं
फाजिल्का के चौवड़ियां कॉलेज ने को-एजुकेशन के लिए मान्यता मांगी थी, लेकिन सिंडिकेट को कई शिक्षकों ने लिखित में दिया कि उनका शोषण किया गया। उन्हें नौकरी से निकाला गया। सिंडिकेट ने कॉलेज को आदेश दिए हैं कि शिक्षकों को पहले वापस नौकरी पर रखा जाए और पूरा स्पष्टीकरण दें। उसके बाद इस मान्यता पर निर्णय लिया जाएगा।
डीएवी कॉलेज को मिली राहत
डीएवी कॉलेज ने पिछले साल एमबीए में छात्रों के दाखिले कर लिए, लेकिन मान्यता नहीं ली। सिंडिकेट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आदेश दिए कि कॉलेज मानकों की पूर्ति करे, उसके बाद ही मान्यता मिलेगी, लेकिन इस पर कॉलेज ने काम नहीं किया। इसके कारण छात्रों के एग्जाम पर रोक लगा दी गई।
अब सिंडिकेट ने कह दिया कि छात्रों के एग्जाम मई में कराए जाएं, और जून तक कॉलेज मान्यता के मानकों को पूरा करे। इस मामले में कॉलेज को राहत मिल गई। इसके अलावा शिक्षकों के प्रमोशन, एक्सटेंशन आदि के प्रस्ताव भी पास हुए। पूर्व में हुई सिंडिकेट की बैठकों के मिनट भी पास किए गए।
ये बढ़ी हैं सीटें
माइक्रोबियल बायोटेकभनोलॉजी में सीटों की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई है। शुल्क 67790 रखा गया है। यूआईएलएस से एलएलएम मॉर्निंग व इवनिंग में सीटों की बढ़ाकर 40 से 50 कर दी गई हैं। सेंटर फॉर सोशल वर्क में 30 सीटों की संख्या बढ़ाकर 33 कर दी गईं और एनआरआई की सीटें चार रखी गईं। पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन से एमए में सीटों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गईं। एनआरआई सीटें 6 और दस सीटें इन सर्विस की रखी गई हैं।