पंजाब यूनिवर्सिटी में ये हो क्या रहा है...स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष चेतन चौधरी के बाद अब उपाध्यक्ष राहुल कुमार की कुर्सी भी खतरे में पड़ गई है। उनकी भी हाजिरी बहुत कम है। संबंधित विभाग ने डीयूआई प्रो. शंकरजी झा को लिखी चिट्ठी में कहा है कि उन्हें एग्जाम में नहीं बैठने दिया जाए। इस बात का पता चलते ही उपाध्यक्ष समेत पूरे एनएसयूआई संगठन में हड़कंप मचा गया है। कोई अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहा है तो कोई नेताओं से सिफारिश करवा रहा है। 2 दिसंबर से पीयू में एग्जाम शुरू होने जा रहे हैं।
इन दो मामलों से साफ जाहिर होता है कि छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए छात्र नेता केवल यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना चाहते हैं उन्हें कोर्स या विषयों से कोई लेना देना नहीं है। एनएसयूआई के टिकट से चुनाव लड़ने वाले उपाध्यक्ष राहुल कुमार ने डिप्लोमा इन फॉरेंसिक साइंस में एडमिशन लिया था। चुनाव से पहले कुछ दिन कक्षा में गए। वह इसलिए कि उसी हाजिरी के बेस पर चुनाव लड़ा जाता है। जैसे ही छात्र संघ चुनाव खत्म हुआ तो उसके बाद से कक्षा में वह नहीं गए।
एंथ्रोपोलॉजी विभाग ने समय समय पर उन्हें सूचित भी किया, लेकिन जब हाजिरी काफी कम हो गई तो विभाग अध्यक्ष ने डीयूआई को अवगत कराया। यह भी कहा है कि 75 फीसदी हाजिरी एग्जाम में शामिल होने के लिए चाहिए, लेकिन यह पूरी नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्हें एग्जाम में नहीं बैठाया जा सकता। मालूम हो कि 2 दिसंबर से पीयू में एग्जाम शुरू होने जा रहे हैं। इस कारण छात्र नेता अपना नाम बचाने के लिए दौड़भाग कर रहे हैं। हालांकि सोमवार को स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस संबंध में उपाध्यक्ष राहुल कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
विपक्षी छात्र संगठन बोले- क्यों नहीं काटा राहुल का नाम
पीयूसीएससी अध्यक्ष चेतन चौधरी चुनाव जीतने के बाद उर्दू विभाग में कक्षा लेने नहीं पहुंचे तो उनका नाम काट दिया गया। यही स्थिति उपाध्यक्ष राहुल कुमार के साथ रही, लेकिन विभाग ने उनका नाम नहीं काटा। विपक्षी छात्र संगठनों के नेताओं का कहना है कि उनका नाम विभाग को काटना चाहिए था, लेकिन उपाध्यक्ष होने के नातेे उन्हें विभाग ने सपोर्ट किया, जो गलत है।
इनसे क्या सीख लेंगे अन्य छात्र
पीयूसीएससी अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों से छात्र प्रेरणा लेते हैं और प्रेरित होते हैं। लेकिन जब छात्र नेता ही कक्षाओं में नहीं जा रहे हैं तो फिर अन्य विद्यार्थी उनसे क्या सीख लेंगे। हालांकि छात्र नेताओं का कहना है कि वह छात्रों के हितों के कार्य करवाने में ही व्यस्त रहते हैं, लेकिन इस बात को जानकार स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क है कि माह में चार से पांच दिन का कार्य हो सकता है। लेकिन 30 दिन छात्रों के लिए बैठकें पदाधिकारी करें या कर रहे हैं, यह बात किसी को हजम नहीं हो रही है।
छात्र संघ चुनाव के बाद उपाध्यक्ष राहुल कुमार कक्षा में नहीं पहुंचे। उनकी हाजिरी काफी कम है, इसलिए डीयूआई को अवगत करा दिया गया है कि वह एग्जाम में नहीं बैठ सकेंगे।
- प्रो. केवल कृष्ण, चेयरमैन, एंथ्रोपोलॉजी विभाग