पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट की बैठक में रखे सात प्रस्ताव पास हो गए, लेकिन ईवनिंग स्टडीज के नाम को बदलकर मल्टी डिसिप्लेनरी रिसर्च सेंटर करने पर आपत्ति दायर कर दी गई। आखिर में यह प्रस्ताव गिर गया। इस पर डिस्कशन होगा। उसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जाएगा। यह मामला हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह ने उठाया था, उसके बाद कई सदस्यों ने प्रो. गुरमीत की बात का स्वागत किया। इसके अलावा 577 करोड़ का प्रस्ताव पास किया गया। शिक्षकों के प्रमोशन के मामले भी हल हुए। पंजाब के कॉलेजों में पूर्व में लिया गया निर्णय लागू किया गया। इन कॉलेजों में ओबीसी छात्रों को आरक्षण अब पांच फीसद की जगह सात फीसद दिया जाएगा। लाइब्रेरी में सहायक लाइब्रेरियन के पद सृजित करने को भी अनुमति प्रदान की गई।
शिक्षकों की तैनाती पर हंगामा
सीनेट की बैठक में गैस फैकल्टी को लेकर मामला उठाया गया। कहा गया कि गैस फैकल्टी कॉलेजों में बेहतर काम करती हैं, लेकिन उनके वेतन के बारे में सोचना चाहिए। इस पर काफी बहस हुई। वीसी ने कहा कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा 136 कॉलेजों के शिक्षकों को वेतन न मिलने का मामला उठाया गया। इस पर भी आश्वासन मिला। इस दौरान पूर्व मंत्री पवन बंसल ने कहा कि बजट का जिस तरह बुक में जिक्र किया है वह तरीका सही नहीं है, उसे सुधारा जाए। बजट का लक्ष्य पूरा न होने पर भी सवाल उठाए गए। इसके अलावा मुक्तेश्वर रीजनल सेंटर के लिए नई भर्ती का मामला भी उठाया गया। इस दौरान वीसी ने कहा कि सभी के सुझावों का स्वागत है। इस पर काम होगा। पीयू को कई जगह से फंड मिल रहा है। कुछ सदस्यों ने सेमेस्टर प्रणाली का भी सवाल उठाया । कुछ ने इसके पक्ष में बात रखी तो कुछ ने अनुअल एग्जाम की बात रखी।
इन्हें किया गया बोर्ड के सदस्यों की सूची में शामिल
सीनेट की बैठक में बोर्ड ऑफ फाइनेंस के लिए दो सदस्यों का नाम चयनित होना था। इसके लिए डॉ. दिलीप कुमार, डॉ. मुकेश अरोरा व रघबीर दयाल ने रजिस्ट्रेशन किया था। पहले सीनेट में एक नाम विड्रो करने के लिए इनसे कहा गया लेकिन बाद में चुनाव कराए गए। इस दौरान 61 वोट डाले गए। इसमें डॉ. दिलीप को 61 व रघबीर दयाल को 15 मत मिले। दोनों को ही बोर्ड के सदस्यों की सूची में शामिल किया गया। डॉ. मुकेश अरोरा को 13 मत मिले।
सीनेट में एक हुए कांग्रेसी
सीनेट की शनिवार को हुई बैठक में कांग्रेसी समझे जाने वाले दिग्गज प्रो. नवदीप गोयल, प्रो. अशोक गोयल एक दिखे। एक साथ बैठे और एक साथ रणनीति बनाते नजर आए। साथ ही डीएवी पक्ष की ओर से भी समर्थन मिला। अचानक बदले इस रुख से सभी सीनेटर हैरत में थे। कुछ ने कहा कि तीन राज्यों में भाजपा को मिली पटखनी के कारण अब सदस्यों का रुख भी बदला है। हालांकि इसके कारण साफ नहीं किए गए।