फीस बढ़ोतरी के विरोध में पीयू स्टूडेंट काउंसिल
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पंजाब यूनिवर्सिटी को अपने हिस्से का फंड देने से पंजाब के इनकार के बाद पीयू प्रशासन में बेचैनी का माहौल है। पंजाब का यह रुख सियासी लोगों के गले भी नहीं उतर रहा है। अब इस मसले में हस्तक्षेप करने के लिए चंडीगढ़ और पंजाब के गवर्नर पर ‘दबाव’ की रणनीति बनाई जा रही है।
इसके लिए कांग्रेस और भाजपा नेता जहां अपने तरीके से गवर्नर पर पीयू मसले में हस्तक्षेप का दबाव बना रहे हैं। वहीं, छात्र संगठन व पीयू प्रशासन भी इस मांग को बुलंद कर रहे हैं कि गवर्नर वीपी सिंह बदनौर पीयू को आर्थिक संकट से उबारने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
इसी रणनीति के चलते जहां चंडीगढ़ में कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री पवन बंसल गवर्नर से मिल चुके हैं, वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद एवं एडिशनल सोलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन ने भी गवर्नर से इसी मसले पर लंबी बातचीत की।
इसके अलावा शुक्रवार दोपहर को जहां पीयू के वीसी अरुण ग्रोवर ने गवर्नर से मीटिंग कर उनके समक्ष पीयू की आर्थिक बदहाली का ब्योरा और फीस वृद्धि की मजबूरियों को रखा।
फंड स्ट्रक्चर पहले की तरह बहाल कराएं गवर्नर
Pawan Kumar Bansal
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पूर्व कैबिनेट मंत्री पवन बंसल ने गवर्नर से मांग की है कि वे पीयू का फंड स्ट्रक्चर को पहले की तरह बहाल करवाएं ताकि केंद्र पर पीयू की फंडिंग बढ़ाने का दबाव बन सके। दरअसल, पहले पीयू यूनियन टेरेटरी चंडीगढ़ की निगरानी में था और पीयू का बजट गृह मंत्रालय के बजट का ही हिस्सा होता था।
बाद में चंडीगढ़ का हस्तक्षेप खत्म कर यह तय किया गया कि यूनिवर्सिटी के सालाना घाटे का 60 फीसदी बजट केंद्र सरकार देगी और 40 फीसदी पंजाब देगी। मगर फिर यह तय हुआ कि पंजाब सिर्फ 20 करोड़ रुपये ही सालाना देगी।
लेकिन अब चूंकि पंजाब ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पीयू को दिए जाने वाले अपने हिस्से से साफ इनकार कर दिया है, उससे पीयू पर आर्थिक संकट और गहरा गया है।
पंजाब के 172 कॉलेज पीयू के अंतर्गत, फिर फंड से इनकार क्यों
फीस बढ़ोतरी के विरोध में पीयू स्टूडेंट काउंसिल
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भाजपा के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने भी गवर्नर से मिलकर सारे हालातों से अवगत करवाया। जैन ने गवर्नर को बताया कि पंजाब यूनिवर्सिटी के अंतर्गत कुल 192 कॉलेजों में से 172 पंजाब में हैं। ऐसे में पंजाब यूनिवर्सिटी को फंड देने से पंजाब कैसे मुकर सकता है।
साथ ही यह भी बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सन 2008 में ही पंजाब यूनिवर्सिटी की अलॉटमेंट चंडीगढ़ से लेकर यूजीसी को शिफ्ट की गई थी। इस वजह से पीयू का बजट गृह मंत्रालय के बजट से अलग हो गया।
लेकिन उस वक्त यह नहीं सोचा गया कि यूजीसी तो खुद स्वायत्त संस्था है, ऐसे में यूजीसी द्वारा पीयू के पूरे घाटे का बजट वहन करना संभव ही नहीं है। जैन के अनुसार इस मसले पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। गवर्नर को इस मसले पर पहल करते हुए पीयू के चांसलर एवं उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से मिलना चाहिए।