फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीयू हॉस्टल में लड़कियां हो रहीं दिमागी रूप से बीमार, वजह चौंकाने वाली

Sun, 31 Jul 2016 07:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
पंजाब यूनिवर्सिटी हॉस्टल की गर्ल्स ने किया विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
पंजाब यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियां दिमागी रूप से बीमार हो रही हैं। इसकी बहुत बड़ी और चौंकाने वाली वजह सामने आई है। शनिवार को हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों ने वीसी ऑफिस के सामने विरोध प्रदर्शन किया। गर्ल्स हॉस्टल नंबर-2 की सात लड़कियों ने खुद को गंभीर दिमागी बीमारी बताई है।
विज्ञापन


छात्राओं का आरोप है कि हॉस्टल में परोसे जाने वाले दूषित खाने से उन्हें यह बीमारी हुई है। कुछ लड़कियों का पीजीआई में इलाज भी चल रहा है। लड़कियों का कहना है कि न्यूरोसिस्टसिरोसिस (एनसीसी) नामक बीमारी के कारण लड़कियों में चक्कर आना, बेहोश होना और जल्द भूलने के लक्षण शामिल हैं।

मामले में शनिवार छात्राओं ने पीयू के वीसी दफ्तर के सामने प्रदर्शन कर हॉस्टल वार्डन और मैस ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है । बीमारी से ग्रस्त एक छात्रा ने आरोप लाया कि कि गर्ल्स हॉस्टल में लड़कियों को दूषित खाना दिया है। सब्जियों को सही तरह से धोया भी नहीं जाता। तीन साल से हॉस्टल में यही स्थिति है। वार्डन को शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
विज्ञापन


छात्रा के अनुसार डॉक्टर ने गंदे खाने के कारण बीमारी होने की वजह बताई है। पीयू के एक ही गर्ल्स हॉस्टल में एक साथ कई लड़कियों ने यह बीमारी होने की बात कही। इसके बाद कैंपस में तनाव की स्थिति बन गई है। शनिवार को एबीवीपी और एसएफएस छात्र संगठनों ने भी छात्राओं के समर्थन में पीयू प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

यह मामला सामने आने के बाद पीयू प्रशासन के अधिकारी भी सकते में हैं। इन छात्राओं का पीजीआई में इलाज भी चल रहा है। उधर, छात्र संगठनों ने पीयू प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शनिवार को दोपहर पीयू वीसी दफ्तर के सामने  छात्राओं की बीमारी का पता चलने के बाद स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने पूरे मामले में हॉस्टल वार्डन और मैस ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन

हॉस्टल में नहीं होती खाने की चेकिंग

पंजाब यूनिवर्सिटी हॉस्टल की गर्ल्स ने किया विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
पीयू के करीब 18 गर्ल्स और ब्वॉयज हॉस्टल की मैस में खाने की चेकिंग नहीं होती है। पीयू में सिर्फ एक डाईटिशियन की खाना चेक करने के लिए ड्यूटी लगाई है। लेकिन छात्रों का आरोप है कि साल में कभी कभार ही हॉस्टल में खाने की चेकिंग होती है, वह भी खानापूर्ति के लिए। उधर पीयू डाईटिशियन एकता बजाज का कहना है कि उन्हें लड़कियों में कुछ खास बीमारी होने के बारे में जानकारी नहीं है।

तीन साल तक चलता है इलाज
पीजीआई के डॉ. मनीष मोदी के अनुसार एनसीसी बीमारी के इलाज में छह महीने तक का समय लगता है। लेकिन कई बार तीन साल तक दवाई खानी पड़ती है। यह बीमारी सब्जियों या फल को बिना धोए खाने से होती है। एक खास किस्म का कीड़ा पेट से दिमाग या अन्य किसी हिस्से में जाकर असर करता है। फिलॉस्फी विभाग में एमफिल की छात्रा हरविंदर कौर के अनुसार उनके इलाज पर अब तक बहुत खर्च हो चुका है।

इलाज काफी महंगा
एसएफएस छात्र नेता परमिंदर सिंह का कहना है कि इन छात्राओं के इलाज के लिए हर तीन महीने में एक बार एमआरआई कराना पड़ता है। इसके 3500 रुपये देने पड़ते हैं। दवाओं पर भी काफी खर्च आ रहा है। अगर किसी छात्रा का तीन साल तक इलाज चला तो यह लाखों में पहुंच सकता है।  

एक छात्रा के एनसीसी बीमारी से पीड़ित होने के बारे में पता चला है। लेकिन पीयू प्रशासन पूरे मामले की जांच करेगा। अगर मैस ठेकेदार की ओर से घटिया खाना दिया जा रहा है तो पीयू प्रशासन उसे बदल देगा।
-विनीत पूनिया, डायरेक्टर पब्लिक रिलेशन पंजाब यूनिवर्सिटी
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें