संविधान सम्मान यात्रा को लेकर पीयू पहुंचे 15 राज्यों के प्रतिनिधि सोमवार रात 24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल की मांग को लेकर चल रहे प्रोटेस्ट स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने वहां छात्राओं की मांग का समर्थन करते हुए ऐलान किया कि गर्ल्स हॉस्टल 24 घंटे नहीं खोले तो आंदोलन और बड़ा होगा। इस दौरान संघ व भाजपा के खिलाफ भी नारेबाजी हुई। वक्ताओं ने कहा कि संघ की विचारधारा से पीयू में काम नहीं होने देंगे। स्टूडेंट्स के हित करके ही जिम्मेदार लोग आगे बढ़ें। 36वें दिन स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट गर्ल्स हॉस्टल नंबर तीन के सामने चल रहा था।
रात आठ बजे अचानक 15 राज्यों के ऐसे लोग पहुंचे जो अपने-अपने राज्यों में जनता के हितों के लिए आंदोलन चलाए हुए हैं। चाहे वह नर्मदा बचाओ आंदोलन हो या फिर सर्वाहारा आंदोलन। महाराष्ट्र से पहुंचे मुंबई यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन संजय ने कहा कि देश में महिलाओं की आजादी की बात की जाती है लेकिन पीयू में आकर देखा तो उल्टा मिला। यहां छात्राओं को शाम होते ही हॉस्टल में रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि छात्राओं की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन को वह आगे बढ़ाएंगे। यह मुहिम पूरे देश में नया रंग लाएगी।
इनके अलावा प्रोटेस्ट को उड़ीसा के मानस, झारखंड के राजीव मिश्रा, उड़ीसा के मधुसूदन, उत्तराखंड के विमल, उत्तर प्रदेश के सतीश, इनायत, मध्य प्रदेश के रविंद्र ठाकुर, दिल्ली के आर्यमन आदि ने संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि इस आंदोलन को खत्म न होने दिया जाएगा। यही संघर्ष स्टूडेंट्स को फायदा देगा। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा से यदि कोई व्यक्ति किसी संस्थान में काम करने लगता है तो वहां दिक्कतें खड़ी होती हैं। छात्राओं को आजादी दिलाने के लिए उनका पूरा समर्थन है।
इस दौरान स्टूडेंट काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया, आइसा अध्यक्ष विजय कुमार ने भी सभी को आश्वासन दिया कि अब यह आंदोलन तभी खत्म होगा जब उनकी मांगें पूरी तरह मान ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि 24 घंटे हॉस्टल खोलने को लेकर पीयू प्रशासन ने कुछ नियम बदलें हैं, लेकिन वह किसी हाल में नहीं माने जाएंगे। छात्राओं को पूरी तरह आजादी मिलनी चाहिए। रात 11 बजे के बाद बिना किसी रजिस्टर में हस्ताक्षर किए वह बाहर जा सकें। सभी आंदोलनकर्ताओं ने कैंपस में रैली भी निकाली।
इसी सप्ताह देशभर के कई सामाजिक कार्यकर्ता आएंगे पीयू
24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल खुलवाने की मांग को लेकर चल रहे प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए कई प्रदेशों के सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। सूत्रों का कहना है कि आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की बदौलत बड़े-बड़े आंदोलन सफल हुए हैं। सरकारों तक ने उनके आगे हार मानी है। वह यहां विचार रखेंगे। साथ ही रैली भी निकालेंगे।