पंजाब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के प्रश्नपत्र दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षक बना सकते हैं। पीयू ऐसी व्यवस्था करने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था से न तो पेपर आउट होगा और न ही रिपीट। इस पुरानी व्यवस्था को पीयू नए शैक्षिक सत्र से पहले लागू कर सकता है। पीयू में काफी समय पहले एक व्यवस्था थी कि हर कक्षा के प्रश्नपत्र दूसरे विश्वविद्यालय के शिक्षकों से बनवाए जाएं।
इससे पारदर्शिता बनी रहती थी और गड़बड़ी की आशंका भी नहीं थी। पेपर भी रिपीट होने का डर नहीं था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पीयू के जिम्मेदार लोगों ने प्रश्नपत्र की व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया। पीयू से संबद्ध कॉलेजों व पीयू के शिक्षकों से ही प्रश्नपत्र बनवाना शुरू कर दिया। यही प्रश्नपत्र मिड सेमेस्टर एग्जाम में भी आते थे। इस व्यवस्था से निष्पक्षता नहीं रहती।
सूत्रों का कहना है कि डर यह रहता है कि जिन शिक्षकों ने प्रश्नपत्र तैयार किया है वह अपने चहेते विद्यार्थियों या अपनी कॉलेज के विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए पेपर के प्रश्न पहले बता सकते हैं। हालांकि, ऐसा कम होता है। इसके अलावा इस व्यवस्था से पेपर रिपीट भी हो जाता है। इस बार ऐसा ही हुआ और परीक्षा की शुचिता कलंकित हो गई।
एसडी कॉलेज में बीकॉम का एक पेपर मिड सेमेस्टर एग्जाम में करवा दिया गया। वही, पेपर दिसंबर में हुए एग्जाम में आ गया। जब मामला सार्वजनिक हुआ तो पीयू के जिम्मेदार लोगों के होश उड़ गए। पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग गए। अब इसी में बदलाव के लिए बैठकें हो रही हैं। सूत्रों का कहना है कि नए शैक्षिक सत्र से पहले पीयू प्रश्नपत्र बनाने को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रहा है।
पुरानी व्यवस्था फिर से बहाल हो सकती है। इसके साथ ही कुछ नए नियम भी बन सकते हैं। कार्रवाई का प्रावधान भी किए जाने की तैयारी है। क्योंकि इस बार शिक्षक पर कार्रवाई नहीं की गई। केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। हालांकि, इसमें पीयू की भी गलती रही थी कि मिड सेमेस्टर के पेपर को दिसंबर में कैसे विद्यार्थियों को दे दिया गया। पीयू ने इस मामले में दोषी कौन है, इसका पता नहीं लगाया, लेकिन आगे ऐसा नहीं हो, इसकी पूरी व्यवस्था की जा रही है।