पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से 30 से अधिक कॉलेजों ने मान्यता तो ले ली, लेकिन तय समय सीमा एक साल में मानक पूरे नहीं किए। अब इनकी मान्यता पर तलवार लटक गई है। पीयू शैक्षिक सत्र से पहले इन कॉलेजों के मानकों की जांच करने जा रहा है। जिनके मानक पूरे नहीं होंगे उनकी मान्यता खत्म कर दी जाएगी। यह खबर जब कॉलेजों को मिली तो उनमें खलबली मच गई है। वह मानकों की पूर्ति के लिए जुटे हुए हैं।
वर्ष 2016 के बाद पंजाब में कई कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई। कुछ नए कोर्स शुरू करने के लिए चंडीगढ़ के कॉलेजों ने भी आवेदन किए, उन्हें भी इसका लाभ दिया गया। नए कॉलेज की मान्यता के लिए जरूरी है कि स्कूल के नाम जमीन, भवन हो, खेल का मैदान, लाइब्रेरी, प्रशिक्षित शिक्षक, शौचालय होने चाहिए। साथ ही अग्निशमन विभाग से एनओसी होनी चाहिए ताकि आग आदि से बचाव हो सके।
मान्यता के दौरान वर्ष 2017 में मानकों की जांच हुई तो उसमें पंजाब व चंडीगढ़ के 30 से अधिक कॉलेज खरे नहीं उतरे। किसी में लाइब्रेरी में किताबें नहीं थीं तो कहीं पर प्रशिक्षित शिक्षक नहीं मिले। इन सभी मानकों की पूर्ति के लिए पीयू की कमेटी ने एक साल का समय दिया। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश कॉलेजों ने इन मानकों की पूर्ति नहीं की।
कई कॉलेजों ने तो दाखिले विद्यार्थियों के हजारों की संख्या में कर लिए और शिक्षक पढ़ाने के लिए हैं ही नहीं। कई कॉलेजों में शिक्षकों को निकाला भी गया। चारों ओर से मिली शिकायतों के बाद पीयू ने मानकों की जांच करने का फैसला लिया है। सूत्रों का कहना है कि नए शैक्षिक सत्र के शुभारंभ से पहले इन मानकों की जांच हो जाएगी। इस बार इन कॉलेजों को दोबारा मौका नहीं दिया जाएगा।
अन्य कॉलेजों की भी जांच हुई तो खुल जाएगी कलई
सूत्रों का कहना है कि इनके अलावा अन्य कॉलेजों के मानकों की भी जांच हो तो उनकी भी कलई खुल जाएगी। कुछ कॉलेजों ने केवल मान्यता लेने के लिए मानक पूरे किए। जैसे ही मान्यता मिली तो मानक बचे ही नहीं। कुछ कॉलेजों पर तो यह भी आरोप लगे हैं कि उन्होंने बाहरी विद्यार्थियों के दाखिले कर लिए। वह विद्यार्थी कॉलेज नहीं ही आते। केवल परीक्षा कराकर उन्हें मार्कशीट दे दी जाती है। अब देखना है कि पीयू इस कार्य में कितनी निष्पक्षता से कार्य कर पाता है।