छात्र और छात्राएं एक समान हैं। संविधान में भी लिंग आधारित भेदभाव नहीं है। इसी को ध्यान में रखकर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की सीनेट में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। सीनेट ने निर्णय लिया है कि रात को जो भी छात्र-छात्राएं हॉस्टल से बाहर जाएंगी तो उन्हें रजिस्टर में हस्ताक्षर करने होंगे। वीसी प्रो. राजकुमार ने सीनेट के समक्ष फैसला सुनाया। कहा कि लड़कों के हॉस्टल में भी एक रजिस्टर होगा। नियम सभी के लिए बराबर हैं। इस पर सीनेट ने तालियां बजाई।
छात्र-छात्राएं बराबर
छात्र-छात्राएं बराबर हैं। किसी को एक अधिकार अधिक नहीं दिया जाना चाहिए। यहां छात्राओं के हॉस्टल खोलने से उन्हें आजादी मिलेगी। हम इसके पक्ष में थे। यह छात्र एकता की जीत है।
-अनुज सिंह, अध्यक्ष एनएसयूआई
संगठन में ही शक्ति
जब छात्र हित के लिए कोई आंदोलन खड़ा होता है तो उसके परिणाम अच्छे आते हैं। चार संगठनों के अलावा अन्य छात्रों ने साथ दिया। पीयू प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा। आगे भी मांगों को लिए संघर्ष जारी रहेगा। हमारा साथ देने के लिए सभी का आभार।
-- विजय कुमार, अध्यक्ष आइसा
समानता के लिए किया आंदोलन
छात्राओं की मांग जायज थी। उन्हें समानता मिलनी चाहिए थी लेकिन यहां नहीं दी जा रही थी। उसी के लिए आंदोलन किया और जीत मिली। इस जीत के लिए सभी को बधाई।
-अमनदीप कौर, अध्यक्ष पीएसयू ललकार
आज ही मिली आजाद
छात्राओं की आजादी के लिए जिस तरह आज निर्णय हुआ तो ऐसा लग रहा है कि आज ही देश आजाद हुआ है। यह आजादी छात्राओं को आसमान में उड़ने का रास्ता देगी। छात्राएं बाजी मारकर आगे बढ़ेंगी।
-हसनप्रीत, एसएफएस लीडर