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गर्ल्स हॉस्टलः कनुप्रिया की हाजिरी 75 फीसदी से कम, पीयू प्रशासन को मिल गया नया मुद्दा

Mon, 19 Nov 2018 04:18 PM IST
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कनुप्रिया का विरोध प्रदर्शन
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पीयू प्रशासन ने 24 घंटे गर्ल्स हॉस्टल खोलने को लेकर भले ही अपना फैसला सुना दिया हो, लेकिन स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट लगातार अलग रूप लेता जा रहा है। स्टूडेंट्स लीडर को तोड़ने के लिए पीयू प्रशासन ने नई चाल चली है। सूत्रों का कहना है कि पीयू स्टूडेंट काउंसिल की अध्यक्ष कनुप्रिया की अटेंडेंस कम हैं। वहीं, आइसा अध्यक्ष विजय कुमार का भी अटेंडेंस रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। उसी हाजिरी को हथियार बनाकर इन आंदोलनकारी नेताओं के सामने किया जा रहा है। इन छात्र नेताओं ने भी एलान कर दिया कि यदि उन्हें हाजिरी के जरिये नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो उसका हश्र पीयू प्रशासन को भुगतना होगा।
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यह भी साफ कर दिया है कि 20 हजार छात्र-छात्राओं के हित के लिए वह अपना भविष्य दांव पर लगाने को तैयार हैं। छात्राओं का डे नाइट प्रोटेस्ट 18 दिनों से चल रहा है। इसे तोड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। कुछ दिन पहले पीयू प्रशासन ने स्टूडेंट काउंसिल के दो नेताओं को अपने पाले में कर लिया और उसी के बाद पीयू प्रशासन ने हॉस्टल खोलने को लेकर अपना फैसला सुना दिया। उसके बाद से आंदोलन की आग और तेज हो गई। छात्राओं ने मान लिया कि यह लड़ाई अब खुद ही मिलकर लड़नी होगी। आइसा व पीएसयू ललकार ने उनका साथ बनाए रखा।

इसी बीच कैंपस का माहौल शुक्रवार को बदल गया। स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने भी छात्राओं के समर्थन में रैली निकाली और प्रोटेस्ट जारी रखने को कहा। इसके बाद से पीयू प्रशासन भी हरकत में आ गया। वह अपनी तैयारी में जुटा हुआ है। सूत्रों का कहना है कि आंदोलन में जुटे प्रमुख नेताओं की हाजिरी व अन्य डाटा खंगाला जा रहा है। अटेंडेंस 75 फीसदी होनी चाहिए, लेकिन इन नेताओं की नहीं हैं। अब इसी को लेकर छात्र नेताओं को डराया जा रहा है। हालांकि, स्टूडेंट काउंसिल का जो भी अध्यक्ष होता है उसे दस फीसदी अटेंडेंस बोनस में मिलती हैं, लेकिन उसका जिक्र पीयू प्रशासन ने अभी नहीं किया है।
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बीएचयू की राह पर पीयू, केजरीवाल और बालाजी भी आ सकते हैं पीयू
जिस तरह बीएचयू में बवाल हुआ और पूरी दुनिया में वह सुर्खियों में आ गया। उसी तरह पीयू का भी प्रोटेस्ट उस दिशा में कदम बढ़ा चुका है। नेताओं की यहां आवाजाही शुरू हो गई है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, जेएनयू के अध्यक्ष बालाजी भी इस प्रोटेस्ट में शामिल हो सकते हैं। रविवार की रात से प्रोटेस्ट और उग्र होगा। सूत्रों का कहना है कि इस प्रोटेस्ट में अब और रास्ते भी अपनाए जाएंगे ताकि पीयू प्रशासन उनकी मांगें मानने पर विवश हो जाएं। शनिवार की रात भी छात्राओं का डे नाइट प्रोटेस्ट जारी रहा।

अभिभावक भी हो सकते हैं प्रोटेस्ट में शामिल
अभिभावकों की अंडरटेकिंग को हथियार बनाकर पीयू प्रशासन ने प्रोटेस्ट को कम करने की कोशिश की। पीयू प्रशासन का कहना है कि अभिभावक नहीं चाहते कि आंदोलन आगे बढ़े और उनकी बेटियां रात को हॉस्टल से बाहर निकलें। पीयू प्रशासन को घेरने के लिए अब प्रोटेस्ट में प्रदर्शन कर रही छात्राएं अपने अभिभावकों को भी शामिल कर सकती हैं।
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