सीनेट व सिंडिकेट में लगता रहा अड़ंगा
पीयू की ओर से इस पर तीन बार प्रस्ताव तैयार किया गया। इस प्रस्ताव को सीनेट और सिंडिकेट में ले जाया गया, लेकिन कुछ कमियां निकालकर इसे लौटा दिया गया। समिति ने फिर इस पर मंथन किया। रोस्टर में सुधार किया और फिर इसे प्रस्तुत किया। सिंडिकेट ने एक बार फिर रोक लगाई। इसके बाद एक और समिति इसके लिए बनी। कुल मिलाकर आज तक रोस्टर लागू नहीं हो पाया। यही हाल शिक्षकों और कर्मचारियों के रोस्टर का है। हालांकि पीयू का दावा है कि इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
यूजीसी ने भी रोस्टर वेबसाइट पर अपलोड के लिए कहा, लेकिन अब तक नहीं हो पाया
पिछले महीने यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा था कि रोस्टर वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और लोगों को जानकारी मिल सके। कई विश्वविद्यालयों ने रोस्टर अपलोड कर दिया, लेकिन पीयू यह कार्य नहीं कर पाई। आयोग ने इस बात को भी गंभीरता से लिया। उन्होंने पीयू से भी इसके बारे में जानकारी मांगी थी। एससी, एसटी और बीसी एसोसिएशन प्रधान हरप्रीत सिंह का कहना है कि रोस्टर लागू करने को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
पीयू को 30 करोड़ रुपये देती है पंजाब सरकार
पंजाब सरकार हर साल पंजाब पीयू को लगभग 30 करोड़ रुपये सालाना देती है। आयोग की सिफारिश पर अगर पंजाब सरकार ने यह ग्रांट रोक दी तो पीयू के लिए संकट हो सकता है। इस समय कोरोना काल चल रहा है और पीयू के पास आय के साधन भी कम हो गए हैं। रकम का संकट होगा तो अन्य कार्य प्रभावित होंगे।