डॉ. धीरज सांघी ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के नए डायरेक्टर के रूप में कुर्सी संभाल ली है। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने 5 सवालों के जवाब दिए, पढ़ें।
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अब इंजीनियर्स को सिर्फ टेक्निकल ही नहीं बल्कि क्रिटिकल थिंकिंग के बारे में भी पढ़ाना होगा। क्योंकि अब समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जमाना आ गया है। लोग कहते हैं कि भारत में हर चीज का जुगाड़ है, लेकिन यह तारीफ की बात नहीं बल्कि देश के लिए नुकसानदेह है, क्योंकि जुगाड़ अस्थाई होता है। यह बात पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के नए डायरेक्टर डॉ. धीरज सांघी ने कुर्सी संभालने के बाद अमर उजाला से खास बातचीत में कही। उन्होंने पेक के भविष्य के अलावा अपने जिंदगी के सफर के बारे में खुलकर बातचीत की।
सवाल- दिल्ली से कानपुर फिर अमेरिका और अब चंडीगढ़, कैसा रहा सफर?
जवाब- मेरा दिल्ली के रोहिणी में जन्म हुआ। 12वीं तक पढ़ाई की, जेईई में अच्छा रैंक आया तो कानपुर आईआईटी में दाखिला मिला। उस समय आगे की पढ़ाई के लिए सभी विदेश जा रहे थे तो मैं भी विदेश चला गया। लेकिन कानपुर बहुत पसंद था तो 7 साल बाद वापस आ गया। करीब 20 साल वहां पढ़ाया। पांच साल दूसरे राज्यों में भी पढ़ाया। जिंदगी का पहिया घूम कर अब चंडीगढ़ पहुंचा है। इससे पहले भी कई बार चंडीगढ़ आ चुका हूं। टूरिस्ट के तौर पर यहां कई जगह घूमा।
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सवाल- 7 साल अमेरिका रहने के बाद भारत आकर क्या फर्क महसूस हुआ?
जवाब- मैं 7 साल अमेरिका में रहा हूं। वहां मैंने एक चीज देखी है कि वहां के लोग जो भी बात कहते हैं, उसके पीछे एक तर्क होता है। उसका बेस होता है। अमेरिका जाने का मकसद सिर्फ पढ़ाई नहीं था, बल्कि मैं दुनिया देखना चाहता था। मैंने अपनी पीएचडी करने में औरों से करीब डेढ़ साल ज्यादा समय लिया। इसके पीछे कारण था कि मैंने वहां हर एक चीज के बारे में जानकारियां जुटाई।
सवाल- हमारे देश को जुगाड़ टेक्नोलॉजी का देश कहा जाता है, क्या मायने हैं इसके?
जवाब- लोग कहते हैं कि भारत में हर चीज का जुगाड़ है, लेकिन यह तारीफ की बात नहीं बल्कि देश के लिए नुकसानदेह है, क्योंकि जुगाड़ अस्थाई होता है। हमें थोड़ी डिटेल मिल जाती है तो हम कुछ वैसा बना तो देते हैं, लेकिन वह ऑरिजनल नहीं होता। हमारे यहां बहुत टैलेंट है। जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सस्ता होने के भी नुकसान है, क्योंकि एक बार वैसा बना दो तो फिर सरकार भी अगली बार कहेगी कि जो चीज एक करोड़ में बन गई अब उसके लिए 100 करोड़ क्यों दें। लेकिन अब युवाओं के पास रिसर्च के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि अब हर जगह स्टूडेंट से उनके रिसर्च के बारे में पूछा जाता है। बल्कि अब तो प्रोमोशन भी रिसर्च पर ही डिपेंड करने लग गया है।
सवाल- आज के इंजीनियर्स में आप क्या देखते हैं?
जवाब- समस्या है कि हमारे देश में पढ़ाते बहुत हैं। जिस बच्चे ने जेईई क्लियर किया हो, उसने बहुत ज्यादा मेहनत की होती है। कॉलेज में आने के बाद उसे आराम देने की जरूरत है। लेकिन यहां फिर उसे कई कोर्सेज पकड़ा दिए जाते हैं जबकि विदेशों में कम पढ़ाया जाता है। इसके अलावा अब इंजीनियर्स को सिर्फ टेक्निकल ही नहीं बल्कि क्रिटिकल थिंकिंग के बारे में भी पढ़ाना होगा। क्योंकि अब समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का जमाना आ गया है और जो छात्र एआई एप्पलीकेशन तैयार करेगा उसको पहले वैसा सोचना भी तो आना चाहिए।
सवाल- पेक को लेकर अब आपकी क्या प्राथमिकताए रहेंगी?
जवाब- यूनिवर्सिटी के दो अहम रोल होते हैं- पहला टीचिंग और दूसरा रिसर्च। पेक टीचिंग के मामले में काफी बेहतर है, लेकिन रिसर्च के लिए हमें हर तरह के संसाधनों को बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी। बेहतर रिसर्च के लिए उपकरणों की जरूरत पड़ेगी जो काफी महंगे हैं। पेक में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए सोमवार को गवर्नर से बात हुई है और वह भी बहुत उत्साहित हैं। इसके अलावा पेक में नए हॉस्टल बनाए जाने की जरूरत है। अच्छी खबर है कि हॉस्टल के लिए 100 करोड़ रुपये जारी भी हो चुके हैं। इसलिए उम्मीद है कि आने वाले समय में रिसर्च पर काफी ध्यान रहेगा।