हाईकोर्ट ने पीयू की यह दलील कि 90 में से केवल 7 सीनेटर सामने आए हैं, बाकी खुश हैं, को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल एक सीनेटर आता तो भी याचिका पर सुनवाई होती। पीयू की दूसरी दलील कि वोटर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी और हिमाचल प्रदेश से हैं और कोरोना के कारण चुनाव नहीं करवाया जा रहा है, भी खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि देश भर में विभिन्न निकायों, विधानसभा व अन्य चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में पीयू की यह दलील सही नहीं है। सभी दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने पीयू को दो माह में चुनाव करवाने का आदेश दिया है।
फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने ये महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं
- पीयू की सर्वोच्च नीति निर्धारक संस्था सीनेट का कार्यकाल खत्म हो चुका है और सिंडिकेट भी मौजूद नहीं है। ऐसे में पीयू को कैसे चलाया जा रहा है। अब वन मैन शो चल रहा है जोकि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।
- वीसी को अधिकार है कि वह चुनाव को परिस्थितियों के अनुरूप टाल सकते हैं, लेकिन अधिकार इतना भी नहीं है कि देशभर में चुनाव हो रहे हैं और वीसी ने चुनाव को अनिश्चित काल के लिए टाल दिया।
- पीयू ने केवल चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल की सलाह को आधार बनाकर चुनाव अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया, यह बात हमारे मन में शंका पैदा कर रही है।
विवाद पर दुख जताया
हाईकोर्ट ने कहा कि पीयू का संविधान बनाने वालों ने यह सोचा भी नहीं होगा कि जो वह शैक्षणिक लक्ष्यों की पूर्ति के लिए तैयार कर रहे हैं, उसका इस्तेमाल अकादमिक अधिकारी अपने हित साधने के साधन के रूप में करेंगे।