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PU सिंडीकेट मीटिंग: विद्यार्थियों के लिए खास सुविधा, प्रोफेसर को कड़ी सजा

Mon, 01 May 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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PU सिंडीकेट मीटिंग - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब यूनिवर्सिटी में रविवार को हुई सिंडीकेट की बैठक में 86 मसलों पर चर्चा की गई। इसकी अध्यक्षता पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरुण कुमार ग्रोवर ने की। बैठक में जहां विद्यार्थियों के लिए एक खास सुविधा शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी, वहीं पीयू के एक प्रोफेसर को छात्रा को यौन प्रताड़ित करने के मामले में ‘कड़ी’ सजा देने की सिफारिश की गई। इसके अलावा पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के प्रस्ताव पर आठ सदस्यीय कमेटी गठित की गई, जो सब पहलुओं पर चर्चा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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पहला बड़ा फैसला
पीयू में इस बार ऑनलाइन होंगे दाखिले और फीस
सिंडीकेट की बैठक में यह तय हो गया है कि इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी और उसके अधीनस्थ रीजनल स्टडी सेंटर में दाखिले ऑनलाइन किए जाएंगे। अब तक  दाखिले मैनुअल होते थे, लेकिन इस शैक्षणिक सत्र 2017-18 में यह दाखिला प्रक्रिया ‘क्लाउड बेस्ड ऑनलाइन एडमिशन मैनेजमेंट सर्विस’ के तहत होगी। इससे छात्रों को बहुत फायदा होगा। उन्हें दाखिलों के विभिन्न शहरों से पीयू तक आकर परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। छात्रों को दाखिलों से जुड़ी हर जानकारी ऑनलाइन मिलेगी और दाखिला प्रक्रिया भी ऑनलाइन ही होगी।

इसके अतिरिक्त दाखिले के लिए चयनित होने वाले छात्रों की फीस भी ऑनलाइन ही इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट व क्रेडिट कार्ड के जरिए होगी। इसके अलावा सिंडीकेट ने ईवनिंग लॉ कोर्स का टाइम भी बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया है। इस कोर्स को बंद करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पीयू अथारिटी को पत्र लिखा था। पीयू ने कोर्स बंद करने के बजाय फिलहाल लॉ कोर्स की कक्षा शुरुआत का समय शाम से दोपहर को कर दिया है। इसके अतिरिक्त एक अन्य फैसले में यूनिवर्सिटी टीचर्स में मास्टर सिनियोरिटी लिस्ट को भी सार्वजनिक कर उसपर कमेंट मांगे हैं।
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दूसरा बड़ा फैसला

- फोटो : File Photo
दूसरा बड़ा फैसला
छात्रा को यौन प्रताड़ित करने वाला प्रोफेसर दोषी करार
सवा साल तक किसने दबाई जांच रिपोर्ट? जांच के आदेश
सिंडीकेट ने एक अन्य बड़े फैसले में छात्रा को यौन प्रताड़ना करने वाले एक सीनियर प्रोफेसर को दोषी करार दे दिया है। प्रोफेसर के खिलाफ ‘कड़ी’ सजा देने की सिफारिश की गई है। इस बड़ी सजा में प्रोफेसर टर्मिनेट व डि-प्रोमोट किया जा सकता है। इसका फैसला पीयू अथारिटी जल्द लेगी। दूसरा, इस मामले की जांच रिपोर्ट सवा साल तक क्यों दबी रही? इसके लिए कौन जिम्मेवार है? इस बारे में भी सिंडीकेट ने जांच के आदेश दिए हैं।

10 सितंबर, 2015 को पंजाब यूनिवर्सिटी कमेटी फॉर सेक्सुअल ह्रासमेंट के समक्ष एक छात्रा ने शिकायत दी थी। छात्रा का कहना था कि उनका सीनियर प्रोफेसर लगातार उसके साथ अश्लील और अभद्र्र बातचीत कर उसे प्रताड़ित कर रहा है। कभी कभी वह शराब पीकर भी कक्षा में आता है और प्रताड़ित करता है। छात्रा ने कहा कि प्रोफेसर उन्हें अकेले कमरे में बुलाता है और फिर उसके साथ अश्लील हरकतें करता है।
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तीसरा बड़ा फैसला

- फोटो : फाइल फोटो
छात्रा ने शिकायत में यह भी कहा कि विरोध करने पर प्रोफेसर ने उससे कहा कि उसके हाथ में उसके विषय से संबंधित इंटरनल एस्समेंट के 40 नंबर हैं। यदि छात्रा ने उसके खिलाफ अपनी जुबान खोली तो वे उसका कैरियर तबाह करेगा। जब प्रोफेसर की हदें बड़ गई तो छात्रा के इस गंभीर आरोपों पर कमेटी ने जांच शुरू की। जांच में छात्रा की ओर से तीन गवाह पेश किए गए और जांच कमेटी ने 7 दिसंबर 2015 को अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर दी। हैरत की बात यह कि जांच रिपोर्ट की इस फाइल को मिलीभगत कर दबा दिया गया। करीबन सवा साल फाइल दबी रही और 30 अप्रैल 2017 को सिंडीकेट बैठक में इस जांच रिपोर्ट को पेश किया गया। 

तीसरा बड़ा फैसला
सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रस्ताव पर कमेटी गठित
आर्थिक संकटों से जूझ रही पीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाई जाए, इस प्रस्ताव पर सिंडीकेट ने संज्ञान लेते हुए आठ सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। दरअसल, पीयू के वरिष्ठ सीनेटर प्रोफेसर डा. गुरमीत सिंह ने प्रस्ताव दिया था कि पीयू का आर्थिक ढांचा गड़बड़ा गया है, इसलिए जरूरी है कि पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाया जाए। अंतत: सिंडीकेट ने इस प्रस्ताव पर एक कमेटी गठित की है। यह कमेटी इंटरस्टेट यूनिवर्सिटी पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलवाने संबंधी सभी पहलुओं पर जांच करेगी और फिर अपनी रिपोर्ट सिंडीकेट में रखेगी।
 
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