कौशल विकास योजना का लाभ भले ही किसी दूसरे विश्वविद्यालयों को मिला हो, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के छह हजार विद्यार्थी इसका इंतजार सालभर करते रहे। न कोर्स करने की मंजूरी मिली और न रकम आई। नेशनल कमीशन फॉर मायनॉरिटी हायर एजुकेशन के सदस्य बलतेज सिंह मान पिछले साल एक बैठक में पीयू पहुंचे थे।
उन्होंने पीयू से कहा था कि वह कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव तैयार करें। उन्हें वह मंजूरी दिलाएंगे। उसके बाद पीयू ने 56 कोर्स संचालन का प्रस्ताव तैयार किया। इस पर तीन करोड़ रुपये खर्च होने थे। प्रस्ताव यहां से केंद्र सरकार के पास पहुंचा, लेकिन इसको मंजूरी अभी तक नहीं मिली।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए प्रयास ही नहीं किए गए। लगभग छह हजार विद्यार्थी इन कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए इंतजार करते रहे। यह विद्यार्थी अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। इसमें सिख, जैन, मुस्लिम आदि आते हैं।
कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था लेकिन अभी मंजूरी नहीं मिली। जैसे ही आदेश मिलेंगे तो कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
- डॉ. हरीश कुमार, निदेशक, कौशल विकास कार्यक्रम, पीयू