इसी तरह पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला से जुड़े मोहाली, रोपड़ के कॉलेज भी अपने विश्वविद्यालय से दूर हैं। नवांशहर के कॉलेजों की दूरी भी उसके विश्वविद्यालय से अधिक है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कॉलेजों को उसके नजदीकी विश्वविद्यालयों से जोड़ दिया जाए। हालांकि, पीयू शासन सुधार वाली उच्च स्तरीय समिति ने केवल रोपड़ व मोहाली के कॉलेजों को पीयू में शामिल करने की सिफारिश चांसलर से की है। जानकारों का कहना है कि जब ये कॉलेज पीयू में आएंगे तो पीयू के कॉलेज भी दूसरे विश्वविद्यालयों में जाएंगे।
कॉलेजों के बंटवारे से ये होगा लाभ
- विश्वविद्यालय का सचल दस्ता परीक्षा के समय आसानी से कॉलेजों तक पहुंच सकेगा।
- अन्य निरीक्षण हो या फिर मानकों की जांच भी आसान होगी।
- छात्रों को अपने कार्य करवाने के लिए लंबी दूरी नहीं तय करनी पड़ेगी।
- पास में कॉलेज होने से छात्राओं की संख्या भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ेगी।
- प्रशासनिक लाभ भी मिलेंगे।
ये आ सकती हैं दिक्कत
फिरोजपुर, मुक्तसर, मुकेरियां आदि क्षेत्रों के कॉलेज पीयू के अधीन हैं। यदि दूसरे विश्वविद्यालयों में इसे शामिल किया गया तो वह इसे स्वीकार शायद ही करें। जानकारों का कहना है कि पीयू का नाम बड़ा है। ऐसे में कॉलेजों को उसका लाभ मिलता है। दूसरे विश्वविद्यालयों में जाने से उन्हें उतना फायदा न हो, इसलिए वह दिक्कत कर सकते हैं।