पंजाब यूनिवर्सिटी विश्व रैंकिंग में लगातार पीछे होती जा रही है। इसका एक बड़ा कारण यह सामने आ रहा है कि पीयू की छवि विश्व स्तर पर बेहतर नहीं हो पाई है। मानकों पर पूरा काम न होने के कारण देश में जारी होने वाली रैंकिंग में भी गिरावट आ रही है। ऐसे में अब पीयू निजी विश्वविद्यालयों की तर्ज पर काम करने की योजना बना रही है। कार्यों का प्रचार-प्रसार इस तरह से किया जाएगा कि पीयू विश्व पटल पर छा जाए। कई बिंदुओं पर पीयू काम कर रही है। उम्मीद है कि जल्द ही रैंकिंग में बेहतर सुधार की खबर आएगी।
क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग हो या फिर टाइम्स रैंकिंग, इन दोनों में ही पीयू का प्रदर्शन पिछले वर्षों में अच्छा नहीं रहा। इसका एक कारण ये माना गया कि विश्व में पीयू की साख को और बेहतर करने की जरूरत है। इसके लिए पीयू समाज में अपना दायरा बढ़ाएगी।
चंडीगढ़ के आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा मुहैया कराना, करिअर संबंधी बाधाओं को दूर करना, शोध के जरिए जीवन आसान करना आदि की योजनाएं बन रही हैं। स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों के व्याख्यान आयोजित करने की भी योजना है। यह शिक्षक जाकर कॉलेजों में पीयू की उपलब्धियों से लेकर वहां के ज्ञान को बांटने का काम करेंगे। इस कार्य में कुछ शिक्षक जुटे भी हुए हैं।
जिम्मेदारियों को बराबर बांटना होगा
पीयू के कुछ शिक्षकों का कहना है कि छवि को बेहतर करने के लिए पीयू को जिम्मेदारियों को बराबर बांटना होगा। एक ही व्यक्ति को अधिक पद देकर खुश करने की मंशा को छोड़ना होगा। जब जिम्मेदारी अलग-अलग होंगी तो हर कोई व्यक्ति अपना बेहतर देने की कोशिश करेगा। कुछ शिक्षकों की राय है कि शिक्षकों से हर साल ये पूछा जाएगा चाहिए कि उनका फोकस सालभर किस बिंदु पर रहेगा। कितने शोध पेपर उन्होंने प्रकाशित किए, यह भी पूछा जाना चाहिए।
जानकारों का कहना है कि एक विश्वविद्यालय को आगे ले जाने के लिए सभी की मेहनत चाहिए। कुछ शिक्षकों की राय है कि निजी विश्वविद्यालय प्रचार-प्रसार पर अधिक रकम खर्च करते हैं। ये महत्वपूर्ण है कि प्रचार-प्रसार किसका करना है, इसके लिए पीयू को मजबूत तथ्य जुटाने चाहिए। विश्वविद्यालय से सकारात्मक समाचार बाहर आने जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार ही आगे आने को तैयार नहीं हैं। इस संबंध में जानकारी के लिए आईक्यूएसी निदेशक डॉ. आशीष जैन से संपर्क साधा गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।
पूर्व छात्रों की भी मदद लेने की तैयारी
पीयू के पूर्व विद्यार्थी देश-दुनिया में एक अलग छाप छोड़ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पीयू उनकी मदद लेगी। वे विश्व पटल पर बताएंगे कि पीयू क्या है। अपनी सफलता के मंत्रों में विश्वविद्यालय का बखान बार-बार करेंगे यानी वह जहां भी जाएंगे तो विश्वविद्यालय की खूबियां जरूर बताएंगे। इसके लिए हर विभाग अपने पूर्व छात्रों की सूची बनाने में लगा है। कुछ के नाम सार्वजनिक हैं और कुछ पूर्व छात्रों के नाम ढूंढे जा रहे हैं।