पंजाब यूनिवर्सिटी(पीयू) एफिलिएटेड कॉलेजों में जनवरी 2016 से फाइव डे वीक शेड्यूल शुरू करने की तैयारी है। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट और यूटी प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव पर सहमति मिल चुकी है। लेकिन, अभी पंजाब सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। नौ अक्तूबर को सीनेट में करीब दो साल से लटके फाइव डे वीक को लागू करने को लेकर काफी चर्चा हुई। आगामी सीनेट में फिर से यह प्रस्ताव आएगा।
पीयू एफिलिएटेड कॉलेजों में पीएचडी और एमफिल के लिए रिसर्च सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया गया है। अब कॉलेज प्रोफेसर को भी यूजीसी ने पीएचडी गाइड बनने की अनुमति दे दी है। पीयू एफिलिएटेड अधिकतर कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स और पीएचडी कोर्स शुरू होने से प्रोफेसर ने रिसर्च वर्क के लिए फाइव डे वीक की मांग की थी। इस मामले को 2013 में जीसीजी-42 प्रोफेसर और पीयू सीनेटर डॉ. दलीप कुमार ने उठाया था।
फाइव डे वीक को लेकर पीयू की ओर से कॉलेजों के लिए अप्रैल 2014 में आयोजित स्पेशल मीटिंग में चंडीगढ़ और पंजाब डायरेक्टर ऑफ हायर एजुकेशन ने फाइव डे वीक पर सहमति दे दी थी। लेकिन बाद में पंजाब सरकार द्वारा फैसला वापिस ले लिया गया। डॉ. दलीप का कहना है कि कॉलेज स्तर पर एमफिल, पीएचडी रिसर्च वर्क शुरू होने से शिक्षकों को रिसर्च वर्क के लिए समय चाहिए। ऐसे में फाइव डे वीक का प्रपोजल तैयार किया गया था।
उन्होंने बताया कि यूजीसी द्वारा सभी यूनिवर्र्सिटी को फाइव डे या सिक्स डे वीक का एकेडमिक शेड्यूल तैयार करने की छूट दी हुई है। ऐसे में कॉलेजों में वर्किंग डे का फैसला यूनिवर्सिटी को अपने स्तर पर लेेना है। उन्होंने कहा कि शनिवार को वैसे भी स्टूडेंट्स की अटेंडेंस काफी कम रहती है। इस मामले पर सीनेट में डॉ. मुकेश अरोड़ा ने कहा कि पंजाब स्थित कॉलेजों में सरकार ने टाइम फाइव डे वीक के हिसाब से सुबह 9 से 4 कर दिया है। लेकिन, अभी फाइव डे वीक को लेकर कोई चिट्ठी जारी नहीं की है। सीनेट में कई कॉलेजों के प्रिंसिपल और प्रोफेसर सीनेटर्स ने भी फाइव डे का समर्थन किया।