पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन हर साल बजट की कमी बताता है, लेकिन उन्हीं की नीतियों के चलते आर्थिक संकट पैदा हो रहा है। कर्मचारियों के स्वीकृत पदों के अलावा लगभग 900 कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई। हर साल इन पर लगभग 36 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। लगातार पीयू पर आर्थिक भार बढ़ता देख ऑडिट विभाग ने आपत्ति दायर की है। वीसी प्रो. राजकुमार को चिट्ठी लिखी है कि अब कोई कर्मचारी न रखा जाए या फिर स्वीकृत पदों पर नियमानुसार तैनाती की जाए।
साथ ही मैनपावर ऑडिट भी कराने की सिफारिश की है ताकि विभागों में यह पता लग जाए कि अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत है या नहीं। पीयू में कुल 5850 पद स्वीकृत हैं। इसमें शिक्षकों के 1500 और 4350 कर्मचारियों के हैं। पीयू ने इन कर्मचारियों के स्वीकृत पद के अलावा 900 अन्य कर्मचारी रख लिए हैं। इसमें 240 क्लर्क, 322 हेल्पर, 129 सिक्योरिटी गार्ड, अकाउंटेंट आदि शामिल हैं। ये सभी कर्मचारी आउटसॉर्सिंग के जरिये यह रखे गए हैं। हालांकि सरकार के आदेश हैं कि आउटसॉर्सिंग के जरिये कर्मचारी रखे जा सकते हैं, लेकिन यहां लगातार संख्या इनकी बढ़ रही है।
इसको लेकर पीयू पर वजन बढ़ रहा है। बड़ी रकम इन कर्मचारियों पर खर्च हो रही है। ऑडिट विभाग ने साफ कहा है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को रखने से पीयू पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। यदि इसे समय रहते कंट्रोल नहीं किया गया तो आगे और भी दिक्कतें होंगी। वीसी से कहा है कि इस पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। कहा, मैनपावर आडिट करा लिया जाए ताकि यह पता लग सके कि कहां कितने कर्मचारियों की जरूरत है और कहां नहीं।
दस साल की अवधि वाले कर्मियों को नहीं किया स्थायी
दस साल से डीसी रेट पर अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को स्थाई नहीं किया गया है। उनका भी यही कहना है कि एमटीएस आदि कंपनियों के जरिये अतिरिक्त कर्मचारी रखे जा रहे हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए। पुराने कर्मचारियों को स्थाई करते हुए उनका सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने से पुराने कर्मचारी बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। तमाम लोग ऐसे हैं जो सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन उन्हें स्थाई नहीं किया गया। पुराने कर्मचारी इसको लेकर वीसी को ज्ञापन देने की योजना बना रहे हैं। जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी कर सकते हैं।