छात्र काउंसिल चुनाव से पहले एनएसयूआई में मतभेद पैदा हो एक हैं। पार्टी के दो गुट बन गए हैं और दोनों ही अलग-अलग राहों पर चल रहे हैं। पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस (पीयू) में 7 सितंबर को प्रस्तावित छात्र काउंसिल चुनाव से छात्र संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कैंपस के सभी छात्र संगठनों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। लेकिन छात्र संगठनों के बीच दरार से बड़े छात्र संगठनों के लिए जीत में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
2014 पीयू छात्र काउंसिल चुनाव में 32 साल में पहली बार नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। लेकिन दो साल में ही पार्टी नेताओं में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर मतभेद पैदा हो गए हैं। बुधवार को पीयू कैंपस में एनएसयूआई के दो दल बन गए हैं। इतना ही नहीं आने वाले दिनों में दूसरे छात्र संगठनों में भी ऐसा होने की संभावना है।
पीयू में नए संगठन की घोषणा
एनएसयूआई छात्र संगठन दो गुटों में बंट गया है। एक तरफ मनोज लुबाना और दूसरी तरफ हरदीप सिंह लाली के समर्थक हैं। लाली ग्रुप ने बुधवार स्टूडेंट सेंटर पर नए पदाधिकारियों की घोषणा कर दी। एनएसयूआई के कई पुराने नेताओं ने स्टूडेंट फ्रंट को ज्वाइन कर लिया है। पूर्व पीयू छात्र काउंसिल प्रधान दिवांशु बुद्धिराजा, हार्दिक नैन, जीवनजोत सिंह चहल, अंकुर सहरावत, ऋषि भारद्वाज और सिमरन कौर गिल जैसे नाम शामिल हैं।
नोटा के लिए यूजीसी ने जारी की चिट्ठी
पीयू और एफिलिएटेड कॉलेजों में होने वाले छात्र काउंसिल चुनाव के लिए बुधवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने पंजाब यूनिवर्सिटी कुलपति को चिट्ठी जारी की है। डीएसडब्ल्यू प्रो. नवदीप गोयल ने कहा कि पीयू छात्र काउंसिल चुनाव में नोटा का विकल्प देगा।
वोट के लिए कसौली और डिस्को का ऑफर
छात्र काउंसिल चुनाव से पहले छात्र संगठनों ने वोट बैंक बढ़ाने के लिए सभी तिकड़म लगाने शुरू कर दिए हैं। छात्र संगठनों ने हिल स्टेशन और डिस्को में ले जाना शुरू कर दिया है। बुधवार को एक छात्र संगठन ने 150 विद्यार्थियों को कसौली के लिए तीन गाड़ियों में भेजा। जबकि दूसरे छात्र संगठन ने डिस्को में पार्टी आयोजित की। अन्य छात्र संगठनों ने भी आने वाले दिनों में वोटर को बाहर ले जाने का प्रोग्राम तैयार कर रखा है।